असम में एक सींग वाले गैंडों की संख्या बढ़कर 3,260 हो गई है। दुनिया की करीब 80% आबादी राज्य में है और 2025 में गैंडा शिकार का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
असम से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को बताया कि राज्य में एक सींग वाले गैंडों यानी Greater One-Horned Rhinoceros की संख्या बढ़कर 3,260 हो गई है। यह संख्या दुनिया में मौजूद इस प्रजाति की कुल आबादी का करीब 80 फीसदी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, नवीनतम सर्वेक्षण में असम में 3,260 गैंडों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि राज्य में लंबे समय से चल रहे वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दुनिया के करीब 4,075 एक सींग वाले गैंडों में से 3,260 असम में
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि दुनिया में एक सींग वाले गैंडों की कुल संख्या करीब 4,075 है। इनमें से लगभग 3,260 गैंडे अकेले असम में पाए जाते हैं। इस तरह दुनिया की करीब 80 फीसदी आबादी का संरक्षण असम में हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य इस प्रजाति के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षित आश्रय बना हुआ है और सरकार इनके संरक्षण के साथ-साथ इनके प्राकृतिक आवास के विस्तार के लिए भी प्रतिबद्ध है।
एक समय विलुप्त होने के गंभीर खतरे का सामना कर चुके एक सींग वाले गैंडे के लिए यह आंकड़ा संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों को दर्शाता है। असम के राष्ट्रीय उद्यान और वन क्षेत्र इस प्रजाति के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं।
2025 में गैंडा शिकार की एक भी घटना नहीं
असम की इस उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि 2025 में राज्य में गैंडा शिकार की कोई घटना दर्ज नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी अवधि में गैंडों की संख्या 3,260 तक पहुंची है। वन्यजीवों के अवैध शिकार पर नियंत्रण को गैंडा संरक्षण की दिशा में अहम कदम माना जाता है, क्योंकि एक सींग वाले गैंडों को लंबे समय तक उनके सींग के लिए अवैध शिकार का सामना करना पड़ा है।
वन मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने भी इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे असम के लिए गर्व के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के करीब 80 फीसदी एक सींग वाले गैंडों का घर असम होना दशकों से जारी संरक्षण प्रयासों, वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों के योगदान को दर्शाता है।
काजीरंगा में 2,600 से ज्यादा गैंडे
असम में गैंडों की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा काजीरंगा नेशनल पार्क में मौजूद है। वन मंत्री जयंत मल्ल बरुआ के अनुसार, अकेले काजीरंगा नेशनल पार्क में 2,600 से ज्यादा गैंडे हैं। काजीरंगा को दुनिया में एक सींग वाले गैंडों के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों में गिना जाता है। यहां गैंडों के अलावा कई अन्य वन्यजीव प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
वहीं, मानस नेशनल पार्क में गैंडों की अनुमानित संख्या करीब 40 से 50 बताई गई है। असम के अलग-अलग संरक्षित क्षेत्रों में गैंडों की मौजूदगी राज्य के व्यापक वन्यजीव संरक्षण नेटवर्क को भी दर्शाती है।
1970 के दशक के बाद दूसरी बार हासिल हुई बड़ी उपलब्धि
वन मंत्री ने बताया कि 2025 में असम में गैंडा शिकार के शून्य ज्ञात मामले दर्ज होना भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके अनुसार, 1970 के दशक के बाद यह केवल दूसरी बार है जब राज्य ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है। गैंडों की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ाने, संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन और अवैध शिकार पर नियंत्रण जैसे कदमों को महत्वपूर्ण माना जाता है।
शिकार की घटनाओं में कमी और गैंडों की संख्या में बढ़ोतरी के आंकड़े एक-दूसरे से जुड़े संरक्षण प्रयासों की ओर संकेत करते हैं। हालांकि, वन्यजीव संरक्षण केवल शिकार रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी अहम होती है।
कभी 100 से भी कम रह गई थी वैश्विक आबादी
एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण की सफलता का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि 1900 के शुरुआती वर्षों में दुनिया में इनकी संख्या 100 से भी कम रह गई थी। लगातार शिकार और प्राकृतिक आवास से जुड़ी चुनौतियों के कारण यह प्रजाति गंभीर संकट में पहुंच गई थी। इसके बाद विभिन्न देशों और संरक्षण संगठनों की ओर से किए गए प्रयासों से इनकी संख्या में धीरे-धीरे सुधार हुआ।
आज असम में 3,260 एक सींग वाले गैंडों की मौजूदगी और दुनिया की करीब 80 फीसदी आबादी का राज्य में होना संरक्षण के लंबे प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। वन मंत्री ने कहा कि गैंडों की बढ़ती संख्या केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह बताती है कि दृढ़ सुरक्षा व्यवस्था, वैज्ञानिक प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के सहयोग से संकटग्रस्त वन्यजीवों की आबादी को फिर से मजबूत किया जा सकता है।
गैंडों के भविष्य के लिए आवास संरक्षण पर जोर
असम सरकार अब गैंडों की सुरक्षा के साथ उनके प्राकृतिक आवास को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य का लक्ष्य प्रत्येक गैंडे की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनके आवास का विस्तार करना है। ऐसे में आने वाले समय में संरक्षित क्षेत्रों का बेहतर प्रबंधन, वन्यजीव निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी गैंडा संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी। असम में गैंडों की मौजूदा आबादी इस प्रजाति के वैश्विक संरक्षण प्रयासों में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करती है।