E20 पेट्रोल को लेकर अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर SIAM की रिपोर्ट दबाने का आरोप लगाया। जानिए पूरा विवाद, E20 फ्यूल पर उठे सवाल और सरकार की प्रतिक्रिया।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) की एक रिपोर्ट में E20 ईंधन में क्लोराइड और नमी (Moisture) की अधिक मात्रा से वाहनों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी, लेकिन केंद्र सरकार के दबाव में इस रिपोर्ट को वापस ले लिया गया।
केजरीवाल ने सवाल उठाया कि जब विज्ञान और इंजीनियरिंग से जुड़े विशेषज्ञ E20 ईंधन को लेकर चिंताएं जता रहे हैं, तो आखिर सरकार इसे देशभर में लागू करने पर क्यों जोर दे रही है।
केजरीवाल ने क्या कहा?
अरविंद केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि SIAM की रिपोर्ट के अनुसार E20 पेट्रोल में क्लोराइड और नमी का स्तर अधिक पाया गया, जिससे वाहनों के इंजन और अन्य पुर्जों को नुकसान पहुंच सकता है। उनका आरोप है कि यह रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद केंद्र सरकार ने SIAM पर दबाव बनाकर इसे वापस लेने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने कहा कि यदि तकनीकी संस्थाएं और ऑटोमोबाइल उद्योग स्वयं इस ईंधन को लेकर चिंता जता रहे हैं, तो सरकार को पारदर्शिता के साथ इस विषय पर जवाब देना चाहिए।
E20 पेट्रोल क्या है?
E20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार का उद्देश्य इस ईंधन के माध्यम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को एथेनॉल उत्पादन के जरिए लाभ पहुंचाना और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है।
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर्यावरण के लिए बेहतर है और इससे विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
SIAM रिपोर्ट को लेकर विवाद
हाल के दिनों में SIAM द्वारा पेट्रोलियम मंत्रालय को भेजे गए एक पत्र में E20 पेट्रोल में कथित क्लोराइड और नमी की समस्या का उल्लेख किए जाने की खबरें सामने आई थीं। बाद में इस पत्र को वापस लिए जाने की भी जानकारी सामने आई, जिसके बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया।
केजरीवाल का आरोप है कि रिपोर्ट को दबाने का उद्देश्य लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुंचने से रोकना था।
सरकार की क्या है दलील?
सरकार की ओर से पहले भी कहा गया है कि E20 ईंधन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त मानक और परीक्षण व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि ईंधन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाती है और आवश्यक जांच जारी है।
सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विपक्ष और सरकार आमने-सामने
SIAM (Society of Indian Automobile Manufacturers) की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ़ लिखा है कि E20 में बहुत ज़्यादा chloride और moisture है, जिससे आपकी गाड़ियाँ ख़राब हो रही हैं। मोदी सरकार ने SIAM पर दबाव डालकर वो रिपोर्ट वापिस करवा दी। क्यों?
जब science और engineering कह रहे… pic.twitter.com/P3CFv3wW3V
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 5, 2026
E20 पेट्रोल को लेकर आम आदमी पार्टी लगातार केंद्र सरकार पर सवाल उठा रही है। इससे पहले भी पार्टी ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया था और नीति की समीक्षा की मांग की थी। दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए खारिज किया है और कहा है कि E20 नीति वैज्ञानिक परीक्षणों और दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है।
वाहन मालिकों के मन में सवाल
इस विवाद के बाद कई वाहन मालिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या E20 पेट्रोल उनके वाहन के लिए सुरक्षित है। विशेषज्ञों का मानना है कि E20 ईंधन के उपयोग की उपयुक्तता वाहन के मॉडल और निर्माता की सिफारिशों पर निर्भर करती है। इसलिए वाहन मालिकों को अपने वाहन निर्माता द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए।
क्या आगे बढ़ेगा विवाद?
केजरीवाल के आरोपों के बाद E20 नीति पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। यदि SIAM रिपोर्ट और उसके वापस लिए जाने के मामले में सरकार या संबंधित संस्थाओं की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण आता है, तो इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जबकि इस विषय पर तकनीकी और नीतिगत बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है।