भारत और वेस्टइंडीज के टी20 मुकाबले के आखिरी ओवर में अर्शदीप सिंह ने शमर जोसेफ की पहली गेंद पर चौका जड़ा। जानिए 35 रन के लक्ष्य, वाइड यॉर्कर की कोशिश और शॉर्ट गेंद से जुड़ा पूरा रोमांचक वाकया।
भारत और वेस्टइंडीज के बीच हैदराबाद में खेले गए टी20 मुकाबले के आखिरी ओवर में एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। मुकाबले में भारतीय टीम की जीत की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी थीं, क्योंकि आखिरी ओवर में जीत के लिए 35 रन बनाने थे और टीम के सभी विशेषज्ञ बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। ऐसे समय में भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने दसवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए आक्रामक अंदाज अपनाया। वेस्टइंडीज की ओर से आखिरी ओवर डालने आए शमर जोसेफ ने शुरुआती दो ओवरों में 37 रन खर्च किए थे, लेकिन अंतिम ओवर में उन्हें अपनी टीम की जीत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मिली। अर्शदीप ने पहली ही गेंद पर बल्ला घुमाया और गेंद बाहरी किनारा लेकर सीमा रेखा के पार चार रन के लिए चली गई। इसके बाद जोसेफ ने अपनी गेंदबाजी की रणनीति बदली और शॉर्ट गेंद का इस्तेमाल किया। अर्शदीप पुल शॉट खेलने के प्रयास में गेंद से संपर्क नहीं कर सके। आखिरी ओवर की इन गेंदों ने मुकाबले के अंतिम क्षणों को रोमांचक बना दिया।
आखिरी ओवर में भारत को चाहिए थे 35 रन
हैदराबाद में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम के सामने लक्ष्य का पीछा करने की बड़ी चुनौती थी। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 248 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इतने बड़े लक्ष्य के सामने भारतीय बल्लेबाजों को शुरुआत से ही तेजी से रन बनाने की जरूरत थी। हालांकि, टीम की पारी के बीच में विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हो गया और भारत लक्ष्य से पीछे होता चला गया।
जब मुकाबला अंतिम ओवर तक पहुंचा, तब भारत के सामने जीत के लिए 35 रन बनाने की चुनौती थी। टीम के प्रमुख बल्लेबाज पहले ही आउट हो चुके थे और क्रीज पर निचले क्रम के बल्लेबाज मौजूद थे। ऐसी स्थिति में जीत हासिल करना बेहद मुश्किल था। क्रिकेट में आखिरी ओवर में 36 रन तक बनाने की संभावना सैद्धांतिक रूप से रहती है, लेकिन इसके लिए लगभग हर गेंद पर छक्का या अतिरिक्त रन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में वेस्टइंडीज की जीत लगभग तय मानी जा रही थी।
शमर जोसेफ के लिए आसान नहीं था आखिरी ओवर
वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज शमर जोसेफ को अंतिम ओवर की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, उनका दिन गेंदबाजी के लिहाज से बहुत अच्छा नहीं रहा था। वह अपने शुरुआती दो ओवरों में 37 रन खर्च कर चुके थे। ऐसे में उनके सामने चुनौती थी कि वह दबाव के बावजूद आखिरी ओवर में अपनी टीम को जीत दिलाएं।
अंतिम ओवर की पहली गेंद पर अर्शदीप सिंह ने आक्रामक शॉट खेलने का प्रयास किया। गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेकर निकल गई और चार रन के लिए सीमा रेखा पार कर गई। दसवें नंबर के बल्लेबाज से ऐसी आक्रामक कोशिश की उम्मीद स्वाभाविक थी, क्योंकि भारत को जीत के लिए असाधारण तेजी से रन बनाने थे।
पहली गेंद पर चौका जाने के बाद जोसेफ ने वाइड यॉर्कर डालने का प्रयास किया, लेकिन इस कोशिश में उनसे अतिरिक्त रन भी चला गया। ऐसे समय में गेंदबाज के लिए अपनी योजना पर टिके रहना और बल्लेबाज के इरादों को समझना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
चौका खाने के बाद जोसेफ ने बदली गेंद की लंबाई
पहली गेंद पर चौका पड़ने के बाद शमर जोसेफ ने अगली गेंद पर अलग रणनीति अपनाई। उन्होंने यॉर्कर की जगह शॉर्ट गेंद डाली। अर्शदीप सिंह इस गेंद पर पुल शॉट खेलने के लिए गए, लेकिन उनका बल्ला गेंद तक नहीं पहुंच पाया।
यह बदलाव महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे पहले जोसेफ वाइड यॉर्कर के जरिए बल्लेबाज को बड़े शॉट खेलने से रोकना चाहते थे। पहली गेंद पर चौका खाने और अतिरिक्त रन देने के बाद उन्होंने गेंद की लंबाई बदलने का फैसला किया। शॉर्ट गेंद का उद्देश्य बल्लेबाज को अलग तरह का शॉट खेलने के लिए मजबूर करना हो सकता था।
अर्शदीप के शॉट खेलने से चूकने के बाद वेस्टइंडीज को राहत मिली। हालांकि, इतने बड़े लक्ष्य के कारण मैच का परिणाम लगभग तय माना जा रहा था, फिर भी आखिरी ओवर में गेंदबाज की हर गेंद पर दर्शकों की नजर बनी हुई थी।
अर्शदीप ने निचले क्रम में दिखाया आक्रामक अंदाज
अर्शदीप सिंह मुख्य रूप से अपनी तेज गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह बल्लेबाजी में भी बड़े शॉट खेलने का प्रयास करते हैं। इस मुकाबले में जब भारत के पास खोने के लिए बहुत कम बचा था, तब उन्होंने पहली ही गेंद पर आक्रामक रुख अपनाया।
निचले क्रम के बल्लेबाजों के सामने ऐसी परिस्थितियों में दो विकल्प होते हैं। वे विकेट बचाकर खेलने की कोशिश कर सकते हैं या फिर टीम की जीत की बची हुई उम्मीदों के लिए बड़े शॉट लगा सकते हैं। अर्शदीप ने दूसरे विकल्प को चुना। पहली गेंद पर बाहरी किनारा लगने के बावजूद चौका मिलना भारतीय खेमे के लिए एक छोटा-सा सकारात्मक पल था।
हालांकि, एक चौका या कुछ रन पूरे मैच की तस्वीर नहीं बदल सकते थे, क्योंकि आखिरी ओवर में भारत को 35 रन की जरूरत थी। इसके बावजूद अर्शदीप का प्रयास इस बात का उदाहरण था कि बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय बल्लेबाज आखिरी गेंद तक संघर्ष करने की कोशिश करते हैं।
बड़े लक्ष्य ने भारत की मुश्किलें बढ़ाईं
वेस्टइंडीज के 248 रन के स्कोर ने भारतीय टीम पर शुरुआत से ही दबाव बना दिया था। इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करने के लिए मजबूत शुरुआत के साथ-साथ बीच के ओवरों में साझेदारियां बनाना और अंत तक विकेट बचाए रखना जरूरी था। लेकिन भारतीय टीम ऐसा करने में सफल नहीं रही और अंतिम ओवर में जीत की संभावना लगभग समाप्त हो गई।
इस मुकाबले के आखिरी ओवर में शमर जोसेफ और अर्शदीप सिंह के बीच दिखी छोटी-सी टक्कर ने क्रिकेट की रणनीति और दबाव में फैसले लेने की अहमियत को सामने रखा। एक तरफ गेंदबाज चौका खाने के बाद अपनी योजना बदल रहा था, तो दूसरी तरफ बल्लेबाज हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश कर रहा था। अंत में भारत के लिए लक्ष्य हासिल करना बेहद कठिन साबित हुआ और वेस्टइंडीज को मुकाबले में जीत की मजबूत स्थिति मिल गई।