अमन अरोड़ा ने BJP पर पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर निशाना साधा। उन्होंने अकाली-BJP शासनकाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए नशा विरोधी मार्च को चुनावी राजनीति से जोड़ा।
पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। BJP की ओर से पंजाब में नशे के खिलाफ यात्रा और मार्च निकाले जाने के बीच AAP पंजाब अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने BJP पर तीखा हमला बोला है। अमन अरोड़ा ने आरोप लगाया कि जिस राजनीतिक गठबंधन के शासनकाल में पंजाब में नशे की समस्या गंभीर हुई, वही अब नशे के खिलाफ मार्च निकाल रहा है। उन्होंने BJP के इस अभियान को लेकर सवाल उठाते हुए इसे 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा।
अमन अरोड़ा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि BJP का गठबंधन सरकार नशे की समस्या के लिए जिम्मेदार रहा है और अब वही पार्टी नशे के खिलाफ मार्च निकाल रही है। उनके मुताबिक, 2007 से 2017 के बीच पंजाब में रहे अकाली दल-BJP गठबंधन सरकार के कार्यकाल में ‘चिट्टा’ और नशीले पदार्थों की समस्या व्यापक हुई। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि उस दौर में नशा पंजाब के कई हिस्सों तक पहुंचा और नशा कारोबार से जुड़े लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप सामने आए।
2007-2017 के शासनकाल को लेकर अमन अरोड़ा के आरोप
👉🏻 ਭਾਜਪਾ ਦੇ ਗੱਠਜੋੜ ਵਾਲ਼ੀ ਸਰਕਾਰ ਨਸ਼ਿਆਂ ਲਈ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰ ਤੇ ਉਹੀ ਭਾਜਪਾ ਨਸ਼ਿਆਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਯਾਤਰਾ ਕੱਢ ਰਹੀ !
👉🏻 2007 ਤੋਂ 2017 ਤੱਕ ਅਕਾਲੀ-ਭਾਜਪਾ ਸਰਕਾਰ ਵੇਲ਼ੇ ਚਿੱਟਾ ਆਇਆ, ਘਰ-ਘਰ ਪਹੁੰਚਿਆ ਤੇ ਨਸ਼ਾ ਤਸਕਰਾਂ ਦੀ ਪੁਸ਼ਤਪਨਾਹੀ ਹੋਈ
👉🏻 ਪੰਜਾਬ ਲਈ ਸ਼ਰਮਨਾਕ ਰਿਹਾ ਅਕਾਲੀ-ਭਾਜਪਾ ਸਰਕਾਰ ਦਾ ਸਮਾਂ, 2027 ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਨੂੰ ਦੇਖਦੇ… pic.twitter.com/zxgDyNdc8V
— AAP Punjab (@AAPPunjab) September 30, 2026
अमन अरोड़ा ने अपने बयान में 2007 से 2017 के अकाली-BJP शासनकाल को पंजाब के लिए नशे के मुद्दे पर बेहद महत्वपूर्ण दौर बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी अवधि में ‘चिट्टा’ शब्द पंजाब के नशे के संकट से व्यापक रूप से जुड़ा और नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठे। हालांकि, इन आरोपों को AAP के राजनीतिक दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। पंजाब में नशे की समस्या पर अलग-अलग दल एक-दूसरे की सरकारों के कार्यकाल और नीतियों को लेकर आरोप लगाते रहे हैं।
अरोड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि अगर BJP वास्तव में पंजाब को नशामुक्त करने के लिए गंभीर है तो उसे अपने पुराने राजनीतिक गठबंधन के कार्यकाल को लेकर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने BJP के मौजूदा नशा विरोधी अभियान की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर उठाया जा रहा है।
BJP की नशा विरोधी यात्रा पर AAP का सवाल
BJP ने सितंबर 2026 में पंजाब में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इस अभियान के तहत राज्य के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में यात्राएं निकाली गईं और 30 सितंबर को जालंधर में इसका समापन कार्यक्रम हुआ, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए।
इसी अभियान को लेकर AAP नेताओं ने BJP से कई सवाल पूछे हैं। अमन अरोड़ा ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल राजनीतिक यात्राओं और नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने BJP से पंजाब में नशीले पदार्थों की आपूर्ति के स्रोत और तस्करी नेटवर्क को लेकर जवाब मांगा। AAP नेताओं का तर्क है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए तस्करी रोकने, सप्लाई नेटवर्क पर कार्रवाई करने और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास पर भी ध्यान देना जरूरी है।
2027 चुनाव से पहले नशा बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। BJP ने नशामुक्ति अभियान के जरिए इस मुद्दे को प्रमुख राजनीतिक एजेंडे के तौर पर उठाया है, जबकि AAP पुराने SAD-BJP शासनकाल का हवाला देकर BJP पर सवाल खड़े कर रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दल AAP सरकार के कार्यकाल और नशे के खिलाफ उसके दावों पर भी सवाल उठाते रहे हैं।
ऐसे में अमन अरोड़ा का बयान पंजाब की मौजूदा राजनीतिक बहस को और तेज करता है। उनका मुख्य सवाल यह है कि यदि BJP पंजाब को नशामुक्त बनाने की बात कर रही है तो उसे 2007-2017 के अपने गठबंधन शासनकाल को लेकर उठने वाले सवालों का भी जवाब देना चाहिए। दूसरी तरफ BJP और अन्य विपक्षी दल AAP सरकार की नशे के खिलाफ कार्रवाई और उसके नतीजों को लेकर अपने सवाल उठा रहे हैं।
पंजाब में नशे का मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच प्रमुख बहस का विषय बना हुआ है। ऐसे में आने वाले समय में इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।