अजिंक्य रहाणे के संन्यास पर बोले प्रवीण आमरे, ‘ऑस्ट्रेलिया में 36 रन पर ऑलआउट के बाद जीत दिलाना उनकी महानता थी’

अजिंक्य रहाणे के संन्यास पर बोले प्रवीण आमरे, 'ऑस्ट्रेलिया में 36 रन पर ऑलआउट के बाद जीत दिलाना उनकी महानता थी'

 

अजिंक्य रहाणे के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद पूर्व कोच प्रवीण आमरे ने उनकी कप्तानी, ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत और लॉर्ड्स शतक को याद किया। आमरे ने रहाणे को भारतीय क्रिकेट का ‘साइलेंट वॉरियर’ बताया।

भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। 38 वर्षीय रहाणे ने भारत के लिए 2011 में डेब्यू किया था और करीब 12 वर्षों तक टीम का अहम हिस्सा रहे। अपने करियर में उन्होंने 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। खासकर टेस्ट क्रिकेट में उनकी शांत स्वभाव, तकनीकी बल्लेबाजी और दबाव में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उनके संन्यास के बाद क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इसी बीच उनके पूर्व कोच प्रवीण आमरे ने रहाणे के करियर को याद करते हुए उन्हें भारतीय क्रिकेट का “साइलेंट वॉरियर” बताया।

मेलबर्न की पारी को बताया करियर का सबसे बड़ा मोड़

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में प्रवीण आमरे ने कहा कि 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहाणे ने जिस तरह टीम इंडिया को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला, वह उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने याद किया कि एडिलेड टेस्ट में भारत केवल 36 रन पर ऑलआउट हो गया था और पूरी टीम का मनोबल टूट चुका था।

ऐसे समय में नियमित कप्तान विराट कोहली की गैरमौजूदगी में अजिंक्य रहाणे ने टीम की कमान संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शानदार शतक लगाकर भारत को न केवल जीत दिलाई, बल्कि पूरी टीम का आत्मविश्वास भी वापस लौटाया। आमरे ने कहा कि यह केवल एक बल्लेबाज की पारी नहीं थी, बल्कि नेतृत्व और मानसिक मजबूती का बेहतरीन उदाहरण था।

‘साइलेंट वॉरियर’ थे अजिंक्य रहाणे

प्रवीण आमरे ने रहाणे के व्यक्तित्व की तारीफ करते हुए कहा कि वह हमेशा बिना शोर-शराबे के अपना काम करते थे। उन्होंने कहा कि रहाणे को अच्छी तरह पता था कि जब भी टीम को उनकी जरूरत होगी, वह जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार रहेंगे।

आमरे के अनुसार, रहाणे का पूरा क्रिकेट करियर इसी सोच के साथ आगे बढ़ा कि व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा टीम की जरूरत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि रहाणे की कई यादगार पारियां कठिन परिस्थितियों में आईं और यही उन्हें एक बेहतरीन बल्लेबाज बनाता है।

पाकिस्तान में शतक से मिला था बड़ा संकेत

प्रवीण आमरे ने रहाणे के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने मुंबई की ओर से अपना प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) डेब्यू किया था, तभी उनकी प्रतिभा साफ दिखाई देने लगी थी। रहाणे ने कराची के नेशनल स्टेडियम में कराची अर्बन के खिलाफ अपने पहले ही मैच में शतक जड़कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था।

आमरे ने कहा कि उसी समय उन्हें महसूस हो गया था कि इस खिलाड़ी में भारत के लिए खेलने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि डेब्यू मैच में शतक लगाना किसी भी युवा खिलाड़ी के आत्मविश्वास और प्रतिभा का बड़ा प्रमाण होता है।

लॉर्ड्स का शतक भी रहा यादगार

रहाणे के करियर की यादगार पारियों का जिक्र करते हुए आमरे ने 2014 के इंग्लैंड दौरे पर लॉर्ड्स टेस्ट में लगाए गए उनके शतक को भी विशेष बताया। उस समय इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी और हरी पिच पर बल्लेबाजी करना आसान नहीं था, लेकिन रहाणे ने शानदार 103 रन बनाकर भारत की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई।

आमरे ने कहा कि लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर किसी भारतीय बल्लेबाज का नाम दर्ज होना हमेशा गर्व की बात होती है और रहाणे की वह पारी उनके करियर की सबसे बेहतरीन पारियों में शामिल रहेगी।

ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक सीरीज जीत का नेतृत्व

अजिंक्य रहाणे के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रही, जब उन्होंने चोटों से जूझ रही युवा भारतीय टीम की कप्तानी करते हुए ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराया। उस सीरीज में भारत के कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल हो गए थे, लेकिन रहाणे ने युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया और टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी विदेशी टेस्ट सीरीज जीतों में से एक है और इसमें रहाणे की कप्तानी की अहम भूमिका रही।

भारतीय क्रिकेट में हमेशा याद रहेंगे रहाणे

अजिंक्य रहाणे भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हों, लेकिन उनकी शांत नेतृत्व शैली, कठिन परिस्थितियों में खेलने की क्षमता और टीम के लिए समर्पण उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल करता है। उनके पूर्व कोच प्रवीण आमरे के शब्द इस बात की पुष्टि करते हैं कि रहाणे केवल एक बल्लेबाज नहीं, बल्कि ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने हर चुनौती का सामना धैर्य, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ किया। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक ऐसे क्रिकेटर के रूप में याद रखेंगी, जिसने हमेशा टीम को अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखा।

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