एआई शेयरों में निवेश की होड़ और मार्जिन डेट में रिकॉर्ड उछाल। जानिए शेयर बाजार में उभर रहे खतरों और लेवरेज्ड ईटीएफ के जोखिमों का विस्तृत विश्लेषण।
पिछले एक साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अभूतपूर्व प्रगति ने दुनिया भर के शेयर बाजारों—विशेषकर अमेरिका, दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान में—तेजी का एक नया दौर शुरू किया है। निवेशकों के बीच एआई से जुड़ी कंपनियों, जैसे कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) डेवलपर्स और सेमीकंडक्टर चिप निर्माताओं के शेयरों को खरीदने की होड़ मची है। लेकिन इस शानदार तेजी के पीछे एक चिंताजनक तस्वीर उभर रही है: निवेशकों द्वारा लिया जा रहा भारी कर्ज और जोखिम भरा ‘लीवरेज’ (उधार लेकर निवेश करना)। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि यह उत्साह अब एक ऐसे स्तर पर पहुँच गया है, जहाँ लोग बाजार में अपनी पैठ बनाने के लिए रिकॉर्ड दर से पैसा उधार ले रहे हैं।
मार्जिन डेट और जोखिम का बढ़ता दायरा
मार्जिन डेट—वह पैसा जो निवेशक शेयर खरीदने के लिए ब्रोकरेज से उधार लेते हैं—में 54% की भारी उछाल आई है और यह मई 2026 में रिकॉर्ड 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। यह आंकड़ा न केवल निवेशकों की आक्रामकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि बाजार में एक ‘अवास्तविक’ बुलबुला बन रहा है। नेशनवाइड के इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट ग्रुप के मुख्य बाजार रणनीतिकार मार्क हैकेट ने इस स्थिति पर चेतावनी देते हुए कहा है कि बाजार में ‘अनपेक्षित लीवरेज’ का निर्माण हो रहा है, जिसे बहुत से लोग शायद पूरी तरह समझ भी नहीं पा रहे हैं। आज के समय में, कई निवेशक ‘लॉटरी की मानसिकता’ के साथ मार्जिन का उपयोग कर रहे हैं, जो कि जोखिम की कई परतों के बराबर है।
लेवरेज्ड ईटीएफ और सट्टेबाजी का दौर
बाजार में केवल शेयरों की खरीद ही नहीं हो रही है, बल्कि हाई-रिस्क ‘लेवरेज्ड ईटीएफ’ (leveraged ETFs) का चलन भी तेजी से बढ़ा है। ये ईटीएफ किसी शेयर या इंडेक्स की दैनिक चाल का दोगुना या तिगुना रिटर्न देने का वादा करते हैं, जो अपने आप में अत्यंत जोखिम भरा है। 30 मार्च से 3 जून के बीच इन फंडों में संपत्ति बढ़कर 220 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है। इसमें हेज फंडों से लेकर सामान्य खुदरा निवेशक और युवा ट्रेडर्स तक शामिल हैं, जो एआई स्टॉक्स और टेस्ला, एनवीडिया और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के शेयरों में अंधाधुंध पैसा झोंक रहे हैं।
स्पेसएक्स की लिस्टिंग: ‘फोमो’ (FOMO) का एक उदाहरण
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की नास्डैक (Nasdaq) पर लिस्टिंग एआई और टेक-उन्माद का एक प्रमुख उदाहरण है। 135 डॉलर पर लिस्ट होने के बावजूद, ‘फोमो’ (छूट जाने का डर) के कारण निवेशकों ने इसे हाथों-हाथ लिया और शेयर पहले ही दिन 161 डॉलर पर पहुँच गए। बाद में ये 201 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक गए, लेकिन फिर गिरकर 150 डॉलर के आसपास आ गए। यह अस्थिरता दर्शाती है कि कैसे बाजार की बुनियादी वैल्यू से हटकर, निवेशकों का भावनात्मक निर्णय निवेश की दिशा तय कर रहा है।
वॉल स्ट्रीट के लिए एक उभरती बड़ी चुनौती
बाजार पर्यवेक्षकों और बार्कलेज के विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति केवल व्यक्तिगत शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी बाजार व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। बार्कलेज के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के अंत से लेवरेज्ड फंडों ने सिंगल स्टॉक्स और इंडेक्स से जुड़े डेरिवेटिव्स में लगभग 300 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। यह भारी नकदी प्रवाह न केवल शेयरों की चाल को कृत्रिम रूप से बदल रहा है, बल्कि बाजार में एक ‘क्रैश’ की संभावना को भी जन्म दे रहा है। दक्षिण कोरिया के हालिया बाजार व्यवहार ने पहले ही यह संकेत दे दिया है कि जब भारी लीवरेज अचानक वापस लिया जाता है, तो बाजार को कितना बड़ा नुकसान हो सकता है।
सावधानी का समय
आज का वैश्विक निवेशक एआई के भविष्य को लेकर बहुत उत्साहित है, लेकिन उसे यह समझना होगा कि हर तकनीक का अपना एक चक्र होता है। उधार के पैसे पर सवार होकर ‘अल्पकालिक मुनाफा’ कमाने की कोशिश अक्सर लंबी अवधि में विनाशकारी साबित होती है। यदि बाजार में कोई भी बड़ा सुधार आता है, तो ये अत्यधिक लीवरेज्ड फंड निवेशकों की पूंजी को पलक झपकते ही खत्म कर सकते हैं। आने वाला समय इस बात की परीक्षा लेगा कि क्या यह तेजी एक टिकाऊ बदलाव है या मात्र एक सट्टेबाजी का परिणाम। निवेशकों के लिए फिलहाल यही बेहतर है कि वे केवल एआई की चमक पर न जाएं, बल्कि बाजार के ‘रिस्क-रिवॉर्ड’ अनुपात को ध्यान में रखते हुए ही निवेश करें।