अधिक मास 2026, 15 जून को समाप्त हो रहा है। भगवान विष्णु को समर्पित इस महीने के अंतिम दिनों में जानें उन 5 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में, जहाँ दर्शन से मिलता है मोक्ष।
हिंदू धर्म में ‘अधिक मास’, जिसे ‘पुरुषोत्तम मास’ के नाम से भी जाना जाता है, अत्यंत पवित्र माना गया है। यह महीना पूरी तरह से जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए जप, तप, दान, व्रत और तीर्थ यात्रा का फल साधारण महीनों की तुलना में कहीं अधिक होता है। अधिक मास का यह काल 17 मई 2026 को आरंभ हुआ था और यह 15 जून 2026 को संपन्न होने वाला है। यानी अब इस पुण्य काल के समापन में केवल तीन दिन शेष हैं। यदि आप इस अंतिम समय में किसी पवित्र तीर्थ की यात्रा का विचार कर रहे हैं, तो भगवान विष्णु के उन पांच दिव्य धामों के बारे में जानना आवश्यक है जो न केवल आध्यात्मिक शांति देते हैं, बल्कि मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।
बद्रीनाथ धाम: हिमालय की गोद में स्थित विष्णु का वास
उत्तराखंड के दुर्गम और सुंदर पहाड़ियों के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित ‘बद्रीनाथ धाम’ चार धामों में सबसे प्रमुख माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ भगवान बद्रीनारायण तपस्या की मुद्रा में विराजमान हैं। बद्रीनाथ का पौराणिक महत्व इतना अधिक है कि कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहाँ दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अधिक मास में इस धाम की यात्रा करना आत्मा को शुद्ध करने और विष्णु कृपा पाने का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।
जगन्नाथ पुरी: द्वापर युग के श्रीकृष्ण का निवास
ओडिशा के पुरी में स्थित ‘श्री जगन्नाथ मंदिर’ भगवान विष्णु के ही स्वरूप को समर्पित है। यहाँ भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पूजा की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, द्वापर युग की समाप्ति के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने इसी स्थान को अपना निवास बनाया था। जगन्नाथ पुरी न केवल अपनी भव्य रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ की अलौकिक ऊर्जा भक्तों को एक अलग ही शांति का अनुभव कराती है। अधिक मास के समापन से पहले यहाँ की यात्रा करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
श्रीरंगम (रंगनाथस्वामी मंदिर): विष्णु का शयन स्वरूप
दक्षिण भारत के तमिलनाडु में स्थित श्रीरंगम का ‘रंगनाथस्वामी मंदिर’ वैष्णव परंपरा का एक बहुत बड़ा केंद्र है। यह विशाल मंदिर भगवान विष्णु के ‘शयन स्वरूप’ (शेषनाग पर लेटे हुए) को समर्पित है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने मात्र से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस मंदिर की वास्तुकला और यहाँ का शांत वातावरण मन को भक्ति के सागर में डुबो देने वाला है। यदि आप दक्षिण भारत की ओर यात्रा करना चाहते हैं, तो यह धाम सर्वोत्तम है।
द्वारकाधीश: चार धामों की पश्चिमी कड़ी
गुजरात के समुद्र तट पर स्थित ‘द्वारका’ को भगवान कृष्ण की नगरी माना जाता है। द्वारकाधीश मंदिर भी भगवान विष्णु के अवतारों में से एक को समर्पित है और यह मोक्ष प्रदान करने वाले सात पवित्र स्थलों (सप्त पुरी) में से एक है। अधिक मास के इस पावन समय में द्वारका की यात्रा करना न केवल कृष्ण के प्रति समर्पण है, बल्कि यह अपने पापों के प्रायश्चित के लिए भी सबसे उत्तम स्थान माना गया है। यहाँ की संध्या आरती का दृश्य जीवन भर के लिए स्मृति में अंकित हो जाता है।
पद्मनाभस्वामी मंदिर: अनंत का निवास
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित ‘पद्मनाभस्वामी मंदिर’ भगवान विष्णु के उन रूपों में से एक है जहाँ वे ‘अनंत शयन’ में स्थित हैं। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और रहस्यों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ भगवान विष्णु के दर्शन करने का अर्थ है स्वयं के अस्तित्व को अनंत काल के साथ जोड़ना। अधिक मास में यहाँ की पूजा-अर्चना करने से साधक को विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
पुरुषोत्तम मास का लाभ कैसे उठाएं?
15 जून को अधिक मास का समापन हो रहा है। इन बचे हुए तीन दिनों में यदि आप इन पांचों धामों में से किसी एक की भी यात्रा करने में सक्षम हैं, तो यह आपके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव हो सकता है। यदि लंबी यात्रा संभव न हो, तो घर पर रहकर ही भगवान विष्णु के इन धामों का ध्यान करें, ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ का पाठ करें और यथाशक्ति दान करें। अधिक मास का उद्देश्य केवल तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपे ईश्वर को खोजना है। भगवान विष्णु की भक्ति आपको न केवल भौतिक सुख प्रदान करती है, बल्कि यह आपको जीवन के सही अर्थ से भी परिचित कराती है। इस पुरुषोत्तम मास को व्यर्थ न जाने दें और जगत के पालनहार की कृपा का पात्र बनें।