अडाणी पावर ने इंफोसिस को पछाड़ा: बाजार पूंजीकरण में बड़ा बदलाव, आईटी सेक्टर पर मंडराया एआई (AI) का खतरा

अडाणी पावर ने इंफोसिस को पछाड़ा: बाजार पूंजीकरण में बड़ा बदलाव, आईटी सेक्टर पर मंडराया एआई (AI) का खतरा

अडाणी पावर ने बाजार पूंजीकरण में इंफोसिस को पीछे छोड़ा। जानिए आईटी सेक्टर में गिरावट के पीछे एआई (AI) और बदलती बाजार प्राथमिकताओं का क्या कारण है।

भारतीय शेयर बाजार में 27 मई, 2026 को एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में आई जबरदस्त तेजी और आईटी शेयरों में लगातार जारी कमजोरी के चलते अडाणी पावर (Adani Power) ने बाजार पूंजीकरण के मामले में आईटी दिग्गज इंफोसिस (Infosys) को पीछे छोड़ दिया है। यह घटना न केवल निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है, बल्कि भारतीय शेयर बाजार की बदलती तस्वीर का भी संकेत है।

ऐतिहासिक ऊंचाई और अडाणी पावर की शानदार दौड़

मंगलवार को ट्रेडिंग के दौरान अडाणी पावर के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई। इंट्राडे में शेयर 252.65 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसके चलते कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर लगभग 4.82 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, दूसरी ओर इंफोसिस का मार्केट कैप 4.75 लाख करोड़ रुपये पर रहा। अडाणी पावर के शेयरों में पिछले एक साल में लगभग 124 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि दर्ज की गई है। मार्च 2026 में जो शेयर लगभग 139 रुपये पर था, वह 27 मई को 252.65 रुपये के नए 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। बाजार बंद होने तक, कंपनी का मार्केट कैप लगभग 4.77 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।

इंफोसिस और आईटी सेक्टर के लिए चुनौतीपूर्ण दौर

दूसरी ओर, आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंफोसिस के लिए यह साल काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। इस साल इंफोसिस के शेयरों में लगभग 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण एआई (AI) द्वारा उत्पन्न संभावित व्यवधान (disruption), धीमी विकास दर का अनुमान और पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग में कमी है।

कंपनी की चिंताओं को तब और बल मिला जब इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए बहुत ही संयमित गाइडेंस जारी किया। कंपनी ने केवल 1.5% से 3.5% की राजस्व वृद्धि का अनुमान लगाया है, जिसने निवेशकों को बाजार के प्रति सतर्क रहने के लिए मजबूर कर दिया है। इसका सीधा असर स्टॉक पर पड़ा और 14 मई को इंफोसिस का शेयर अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर 1,089 रुपये तक गिर गया।

एआई (AI) का डर और आईटी कंपनियों पर दबाव

इस महीने की शुरुआत से ही आईटी शेयरों पर भारी बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण यह डर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रही तेजी से बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर बुरा असर पड़ सकता है। विशेष रूप से जब से ‘ओपनएआई’ (OpenAI) ने अपनी नई एआई पहल की घोषणा की है, तब से निवेशकों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

आईटी क्षेत्र के लिए यह चिंता सिर्फ एक तात्कालिक प्रभाव नहीं है, बल्कि यह एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत है। पारंपरिक कोडिंग, टेस्टिंग और आउटसोर्सिंग जैसी सेवाओं में अब एआई के हस्तक्षेप से लागत और समय में कमी आ रही है, जिससे आईटी कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है।

निवेशकों के लिए बदलते समीकरण

अडाणी पावर और इंफोसिस की यह तुलना दर्शाती है कि भारतीय शेयर बाजार अब केवल आईटी और बैंकिंग तक सीमित नहीं रह गया है। पावर और बुनियादी ढांचा (Infrastructure) क्षेत्र, जो देश के निर्माण के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं, उन्हें अब निवेशकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। इसके विपरीत, आईटी सेक्टर को भविष्य की तकनीकों (एआई) के साथ तालमेल बिठाने और अपने बिजनेस मॉडल को पुनर्गठित करने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

अडाणी पावर का इंफोसिस को पीछे छोड़ना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उन कंपनियों की बढ़ती ताकत को दर्शाता है जो बुनियादी ढांचा और ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रही हैं, जबकि आईटी सेक्टर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए नवाचार और बदलाव की जरूरत है। आने वाले समय में, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या आईटी कंपनियां इस एआई-आधारित संकट से उबरकर फिर से बाजार में अपनी खोई हुई साख वापस पा पाती हैं या बाजार का नेतृत्व आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूती से इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के हाथों में बना रहेगा। फिलहाल, निवेशकों के लिए सतर्कता और नई संभावनाओं की तलाश ही इस बाजार की असली रणनीति है।

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