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आप’: देदियापाडा विधानसभा की सभी 11 जिला पंचायत सीटों पर आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत। चइतर वसावा के नेतृत्व में बीजेपी का सूपड़ा साफ, मिली जीरो सीट। जानें पूरी खबर।
गुजरात की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। देदियापाडा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जिला पंचायत की सभी 11 सीटों पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने क्लीन स्वीप करते हुए शानदार जीत हासिल की है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है और वह यहाँ ‘जीरो’ सीट पर सिमट गई है। इस जीत के साथ ही विधायक चइतर वसावा ने आदिवासी बेल्ट में अपनी राजनीतिक पकड़ को एक बार फिर साबित कर दिया है।
चइतर वसावा का बढ़ता कद और टीम गुजरात का कमाल
गुजरात की देदियापाडा विधानसभा की सभी 11 जिला पंचायत सीटें आम आदमी पार्टी ने जीत ली हैं।
बीजेपी को यहाँ Zero सीट मिली है।
शानदार @Chaitar_Vasava & Team Gujarat 🔥🔥 pic.twitter.com/CgkKbLfw8e
— Anurag Dhanda (@anuragdhanda) April 28, 2026
इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय देदियापाडा के लोकप्रिय विधायक और आम आदमी पार्टी के दिग्गज आदिवासी नेता चइतर वसावा को दिया जा रहा है। चइतर वसावा के नेतृत्व में ‘टीम गुजरात’ ने जमीनी स्तर पर जो रणनीति बनाई, उसके सामने सत्ताधारी भाजपा की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। चइतर वसावा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी टीम और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए इसे जनता के विश्वास की जीत बताया है। स्थानीय लोगों के बीच चइतर वसावा की ‘आदिवासी अस्मिता’ और विकास की लड़ाई ने इस चुनावी नतीजे में मुख्य भूमिका निभाई है।
बीजेपी के ‘जीरो’ ने उड़ाई रणनीतिकारों की नींद
देदियापाडा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में बीजेपी को एक भी सीट न मिलना गुजरात के आगामी चुनावों के नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है। बीजेपी, जो आमतौर पर जिला पंचायतों में मजबूत पकड़ रखती है, यहाँ ‘आप’ के संगठन के सामने टिक नहीं पाई। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर चइतर वसावा की आक्रामक राजनीति ने मतदाताओं को आम आदमी पार्टी की ओर मोड़ने में सफलता पाई है।
आदिवासी अंचल में ‘झाड़ू’ का दबदबा
यह जीत केवल 11 सीटों की नहीं है, बल्कि यह गुजरात के आदिवासी अंचल में बदलते राजनीतिक मिजाज का संकेत है। देदियापाडा की सभी सीटों पर ‘झाड़ू’ चलने से पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। इस जीत ने साबित कर दिया है कि अगर स्थानीय नेतृत्व मजबूत हो, तो आम आदमी पार्टी पारंपरिक राजनीतिक गढ़ों को भेदने में सक्षम है।