‘मेरे लिए लकी चार्म है गोवा’: शराब नीति मामले में जज के हटने पर बोले अरविंद केजरीवाल- ‘सत्य की हुई जीत, गांधी जी का सत्याग्रह जीता’

'मेरे लिए लकी चार्म है गोवा': शराब नीति मामले में जज के हटने पर बोले अरविंद केजरीवाल- 'सत्य की हुई जीत, गांधी जी का सत्याग्रह जीता'

दिल्ली आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ी कानूनी जीत मिली है। हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा द्वारा केस से हटने (Recusal) के बाद अरविंद केजरीवाल ने गोवा को अपना ‘लकी चार्म’ बताया।

‘गोवा आते ही हुआ बड़ा चमत्कार’: दिल्ली आबकारी मामले में हाईकोर्ट की जज के हटने पर बोले अरविंद केजरीवाल, बताया अपना ‘लकी चार्म’
वेलीम (गोवा):

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तटीय राज्य गोवा को अपना “लकी चार्म” (Lucky Charm) बताया है। गोवा के वेलीम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि जब भी वे गोवा आते हैं, दिल्ली आबकारी नीति मामले (Delhi Excise Policy Case) में उनके पक्ष में कोई न कोई बड़ा और सकारात्मक कानूनी मोड़ जरूर आता है। अरविंद केजरीवाल का यह बयान दिल्ली हाईकोर्ट की माननीय जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा द्वारा इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) करने के फैसले के तुरंत बाद आया है।

आम आदमी पार्टी ने माननीय जज के इस फैसले को अपनी एक बहुत बड़ी कानूनी और नैतिक “जीत” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि नेतृत्व शुरुआत से ही बिल्कुल सही स्टैंड पर कायम था।

‘गोवा आते ही जज साहिबा ने खुद को केस से अलग किया’

जनसभा में जेल के दिनों और अदालती लड़ाइयों को याद करते हुए अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की मोदी सरकार और जांच एजेंसियों पर तीखा हमला बोला। केजरीवाल ने कहा, “इन लोगों ने मेरे खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाए और मुझे 6 महीने के लिए जेल भेज दिया, यह दावा करते हुए कि केजरीवाल ने करोड़ों रुपये का शराब घोटाला किया है। लेकिन सच को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। मैं 26 फरवरी की रात को गोवा से दिल्ली लौटा था, और अगले ही दिन 27 फरवरी को अदालत का आदेश आया जिसने मुझे पूरी तरह बेकसूर घोषित कर दिया।”

केजरीवाल ने आगे कहा, “उस आदेश से सीबीआई और मोदी सरकार बुरी तरह बौखला गए। वे तुरंत मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंच गए। हमने संबंधित जज साहिबा के सामने ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ (हितों के टकराव) का हवाला देते हुए इस केस की सुनवाई से हटने का आवेदन किया, जिसे उन्होंने पहले खारिज कर दिया था। लेकिन परसों जैसे ही मैं दोबारा गोवा पहुंचा, कल उन्होंने खुद को इस केस से अलग कर लिया। इसीलिए मैं कहता हूं कि गोवा मेरे लिए बहुत भाग्यशाली है।”

केजरीवाल के 10 कारणों के बाद लिया गया फैसला: AAP

आम आदमी पार्टी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस पूरी कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि साझा की। ‘आप’ के अनुसार, अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य सह-आरोपियों ने अदालत के सामने निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) के अधिकार का हवाला देते हुए बार-बार आग्रह किया था कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को इस संवेदनशील राजनीतिक मामले से हट जाना चाहिए।
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केजरीवाल ने खुद कोर्ट के सामने पेश होकर और पत्र लिखकर 10 ठोस कारण गिनाए थे कि उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद क्यों नहीं लग रही है। इन कारणों में से एक मुख्य बिंदु यह था कि जज साहिबा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में शामिल हैं।

‘राजघाट पर लिया था सत्याग्रह का संकल्प’

पार्टी ने बताया कि जब शुरुआत में कोर्ट ने केस से हटने की याचिका को खारिज कर दिया था, तब अरविंद केजरीवाल ने न्यायपालिका के प्रति अपना सम्मान बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया था। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी और संकल्प लिया था कि वे इस अदालत के सामने खुद या वकील के माध्यम से पेश नहीं होंगे, बल्कि गांधी जी के ‘सत्याग्रह’ के रास्ते पर चलेंगे।

केजरीवाल का रुख स्पष्ट था कि वे अदालत के हर फैसले को स्वीकार करेंगे और सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाएंगे। अब जज द्वारा खुद को केस से अलग करने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने कहा, “आखिरकार सच्चाई की जीत हुई है। गांधी जी के सत्याग्रह के मार्ग की एक बार फिर विजय हुई है।” इस बीच, दिल्ली सरकार के मंत्री और ‘आप’ नेता सौरभ भारद्वाज ने कोर्ट द्वारा कथित अवमानना की कार्यवाही की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता का हमेशा सर्वोच्च सम्मान करती है।

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