यमुना नदी के प्रदूषण को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा आमने-सामने। AAP ने भाजपा सरकारों पर केमिकल डंप करने और राजनीति करने का आरोप लगाया।
दिल्ली और आसपास के राज्यों में यमुना नदी की खराब होती स्थिति को लेकर एक बार फिर सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा पर यमुना को ‘जहरीला’ बनाने और नदी में खुलेआम रसायन (केमिकल्स) डंप करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का आरोप है कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में भाजपा की सरकारों का वर्चस्व होने के बावजूद नदी की सफाई के नाम पर केवल राजनीति की जा रही है।
“वोट के लिए ड्रामा कर रही भाजपा”
यमुना में ज़हर डाल रही है भाजपा..
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली.. सब जगह भाजपा की सरकार है और सरेआम इसी तरह से केमिकल यमुना में डंप हो रहा है। इन लोगों को यमुना की कोई परवाह नहीं है। सिर्फ ड्रामा करके वोट लेना आता है बीजेपी को। pic.twitter.com/3GG2vt6qCd
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) June 12, 2026
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि इन सरकारों को यमुना की स्थिति से कोई सरोकार नहीं है। पार्टी का कहना है कि यमुना में जिस तरह से बिना किसी डर के औद्योगिक केमिकल छोड़े जा रहे हैं, वह सीधे तौर पर दिल्ली के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। ‘आप’ नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी केवल वोट बटोरने के लिए यमुना की सफाई का नाटक करती है, जबकि जमीनी हकीकत आज भी अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
सुधार के दावों पर उठे सवाल
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यमुना पुनरुद्धार परियोजना की समीक्षा करते हुए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को मिलकर काम करने का कड़ा निर्देश दिया था। सरकार ने 2027 तक 59 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने का महत्वाकांक्षी वादा किया है और हर 20 दिन में कार्य की प्रगति की समीक्षा करने की बात कही है। इसके बावजूद, विपक्षी दल सरकारी तंत्र की गति और कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
दूसरी ओर, भाजपा इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है। भाजपा का तर्क है कि पिछली सरकारों के दौरान यमुना की हालत कहीं अधिक बदतर थी और अब उनकी सरकार के सक्रिय प्रयासों के तहत जल गुणवत्ता में निरंतर सुधार देखा जा रहा है। भाजपा नेताओं का दावा है कि वे तकनीक-संचालित और समयबद्ध तरीके से नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं।
जनता के स्वास्थ्य पर संकट
यमुना में लगातार गिरते कचरे और अनियंत्रित औद्योगिक अपशिष्ट के कारण जल स्तर में अमोनिया की मात्रा बढ़ना आम बात हो गई है, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर दिल्ली की जलापूर्ति पर पड़ता है। विपक्षी दलों का कहना है कि कागजों पर सफाई की भव्य योजनाएं तो बहुत हैं, लेकिन हकीकत में यमुना आज भी औद्योगिक रसायनों और कच्चे सीवेज के कारण एक गंदे नाले के रूप में तब्दील हो चुकी है। नदी की इस दयनीय स्थिति पर जनता के बीच भारी आक्रोश है, जो भविष्य में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने की ओर अग्रसर है।