उत्तराखंड सरकार ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स बनाने की घोषणा की। अग्निवीरों को मिलेगी सीधी तैनाती, जानें उद्देश्य और फायदे।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 2025 के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन किया जा रहा है, जिसमें राज्य के अग्निवीरों को सीधी तैनाती दी जाएगी। इस नई पहल का उद्देश्य बाघों और उनके आवासों की सुरक्षा को सुदृढ़ करना और अवैध शिकार पर नियंत्रण पाना है।
क्या है टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का उद्देश्य?
सीएम धामी ने कहा कि यह विशेष बल वन्यजीव संरक्षण, अवैध शिकार पर रोक, और वन अपराध नियंत्रण जैसे लक्ष्यों पर काम करेगा।
इसमें 80 से अधिक युवाओं की भर्ती की जाएगी, जो प्रशिक्षित अग्निवीर होंगे। इससे जहां बाघों की सुरक्षा मजबूत होगी, वहीं अग्निवीर योजना के तहत प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
बाघों की सुरक्षा में अग्निवीरों की अहम भूमिका
सीएम ने बताया कि अग्निवीर, जो भारतीय सेना के अनुशासित और शारीरिक रूप से प्रशिक्षित सदस्य होते हैं, वे इस बल में अहम भूमिका निभाएंगे। उनकी फिटनेस, मानसिक दृढ़ता और कठिन परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता उन्हें वन्यजीव अपराधों से निपटने में सक्षम बनाती है।
फोर्स का कार्यक्षेत्र क्या होगा?
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बाघों के अवैध शिकार को रोकना
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लकड़ी तस्करी, अवैध खनन, और वन भूमि अतिक्रमण पर निगरानी
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मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में प्रभावी नियंत्रण
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वन क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी
स्थानीय भागीदारी से संरक्षण को मिलेगा बल
सीएम धामी ने कहा कि अग्निवीरों की भर्ती से स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा और बाघ संरक्षण को एक नई दिशा मिलेगी।