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कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि पर AAP नेता हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना। जानिए क्यों जनता पर पड़ रहा है महंगाई का भारी बोझ।
देश में लगातार बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में हो रहे इजाफे के बीच, कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी ने आम आदमी और छोटे व्यवसायियों की कमर तोड़ दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस बढ़ोतरी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है।
5 महीने में ₹1,570 से अधिक की वृद्धि
हरपाल सिंह चीमा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण आम जनता पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले मात्र 5 महीनों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹1,570 से अधिक का इजाफा किया गया है। चीमा ने कहा, “यह सिर्फ एक और बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि देश के छोटे व्यापारियों और रेस्तरां मालिकों पर आर्थिक प्रहार है।”
“भाजपा के पास क्या कोई और पाइपलाइन में है?”
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए हरपाल सिंह चीमा ने तीखे सवाल किए। उन्होंने पूछा कि क्या भाजपा के पास महंगाई कम करने का कोई ठोस विजन है या वे सिर्फ जनता की जेब काटने में लगे हैं? चीमा ने कहा, “भाजपा को देश को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आने वाले दिनों में महंगाई की और कितनी मार आम आदमी को झेलनी पड़ेगी? जनता महंगाई से त्रस्त है और सरकार है कि हर दूसरे दिन कीमतों में आग लगा रही है।”
आम जनता पर सीधा असर
AAP नेता का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने से केवल बड़े उद्योग ही नहीं, बल्कि ढाबे, छोटे कैफे और मध्यम वर्गीय व्यवसायी सीधे प्रभावित हो रहे हैं। महंगाई के इस दौर में राहत देने के बजाय सरकार का लगातार बोझ डालना उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि आम आदमी पार्टी इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी और सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगी।
- महंगाई का बोझ: 5 महीनों में ₹1,570 से अधिक की बढ़ोतरी।
- छोटे व्यवसायी प्रभावित: होटल और रेस्तरां उद्योग के लिए परिचालन लागत में भारी वृद्धि।
- सरकार की विफलता: आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा सरकार की ‘जनविरोधी नीति’ करार दिया।
- जवाबदेही की मांग: केंद्र सरकार से महंगाई पर स्पष्ट नीति और जनता को राहत देने की मांग।