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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर गुजरात जाएंगे। पीएम ने पत्र लिखकर सोमनाथ को भारत की अदम्य शक्ति का प्रतीक बताया और 1000 दिनों की विशेष पूजा की घोषणा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्मित स्वरूप के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश के नाम एक मार्मिक और ऐतिहासिक पत्र साझा किया है। 11 मई का यह दिन भारतीय इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1951 में स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप का लोकार्पण कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया था। अपने लेख ‘सोमनाथ और भारत की अदम्य भावना’ में प्रधानमंत्री ने न केवल मंदिर के धार्मिक महत्व को रेखांकित किया है, बल्कि इसे भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान और कभी न झुकने वाले स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक बताया है। पीएम मोदी इस ऐतिहासिक अवसर पर स्वयं सोमनाथ धाम में उपस्थित रहकर इस ‘स्वाभिमान पर्व’ का हिस्सा बनेंगे।
संघर्ष और संकल्प की विजयगाथा
पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 11 मई को मुझे एक बार फिर वहां जाने का सौभाग्य मिलने वाला है। यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावनस्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए किस प्रकार देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया। देशवासियों के…
— Narendra Modi (@narendramodi) May 8, 2026
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में सोमनाथ मंदिर के इतिहास को ‘विध्वंस से सृजन’ की एक ऐसी गाथा के रूप में वर्णित किया है, जो दुनिया के किसी भी अन्य स्मारक में दुर्लभ है। उन्होंने उन तमाम पीढ़ियों और वीर योद्धाओं को नमन किया जिन्होंने सदियों तक विदेशी आक्रांताओं के हमलों के बावजूद सोमनाथ की ज्योति को बुझने नहीं दिया। पीएम ने लिखा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास का प्रमाण है। जब-जब इस पर प्रहार किया गया, तब-तब यह पहले से अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा हुआ। उन्होंने विशेष रूप से सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान का स्मरण किया, जिन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद जूनागढ़ के विलय और सोमनाथ के पुनर्निर्माण का ऐतिहासिक संकल्प लिया था। सरदार पटेल का मानना था कि सोमनाथ का वैभव वापस आना भारत के सांस्कृतिक पुनरुदय के लिए अनिवार्य है। प्रधानमंत्री ने के.एम. मुंशी और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के योगदान की भी सराहना की, जिन्होंने कठिन समय में भी इस पावन स्थल की गरिमा की रक्षा की।
1000 दिनों की विशेष पूजा: साहस को नमन
इस महत्वपूर्ण वर्षगांठ को चिरस्मरणीय बनाने के लिए प्रधानमंत्री, जो सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, ने एक अभूतपूर्व घोषणा की है। उन्होंने बताया कि सोमनाथ धाम में अगले 1000 दिनों तक एक विशेष आराधना और पूजा का आयोजन किया जाएगा। यह 1000 दिनों का अनुष्ठान उन 1000 वर्षों के अदम्य साहस, धैर्य और लचीलेपन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक जरिया होगा, जो भारतीय समाज ने विदेशी आक्रमणों और दमन के दौर में दिखाया था। पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे इस विशेष कालखंड के दौरान सोमनाथ की यात्रा अवश्य करें। उनका मानना है कि सोमनाथ के दर्शन मात्र से व्यक्ति को भारत की ‘अपराजित संस्कृति’ की शक्ति का बोध होता है। यह पूजा केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह बताने का प्रयास है कि सत्य और श्रद्धा को कोई भी शक्ति मिटा नहीं सकती।
विरासत और विकास का आधुनिक संगम
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र के माध्यम से सरकार के ‘विकास भी, विरासत भी’ के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है, लेकिन आधुनिक दृष्टि के साथ। सोमनाथ धाम का कायाकल्प इसका बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ प्राचीन स्थापत्य कला और आधुनिक सुविधाओं का अद्भुत संगम है। प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम, भव्य अयोध्या राम मंदिर, केदारनाथ का पुनर्निर्माण और उज्जैन के महाकाल लोक का उदाहरण देते हुए कहा कि इन आध्यात्मिक केंद्रों के सशक्तिकरण से न केवल हमारी सांस्कृतिक चेतना जाग्रत हुई है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। बेहतर कनेक्टिविटी, प्रोमेनेड का निर्माण और श्रद्धालुओं के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं होने से पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, जो अंततः ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को सिद्ध कर रहा है।
एक नए भारत का उदय
पीएम मोदी का यह पत्र 140 करोड़ भारतीयों को अपनी गौरवशाली विरासत पर गर्व करने का आह्वान है। उन्होंने अंत में लिखा कि सोमनाथ मंदिर हमें सिखाता है कि समय कितना भी कठिन क्यों न हो, यदि संकल्प पवित्र है, तो पुनर्निर्माण निश्चित है। 75वीं वर्षगांठ का यह अवसर केवल एक मंदिर के लोकार्पण का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस नए भारत के उदय का उत्सव है जो अपनी विरासत को संजोते हुए आधुनिकता के शिखर की ओर अग्रसर है। 11 मई को सोमनाथ की भूमि से प्रधानमंत्री एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक शक्ति का उद्घोष करेंगे, जो पूरे विश्व को शांति और स्थिरता का संदेश देगा।