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“ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगल 12 मई 2026 को मनाया जाएगा। जानें हनुमान जी की कृपा पाने के लिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन दान-पुण्य का विशेष धार्मिक महत्व।”
बड़ा मंगल 2026: ज्येष्ठ माह के दूसरे बड़े मंगल का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
सनातन धर्म में मंगलवार का दिन शक्ति, साहस और भक्ति के प्रतीक भगवान हनुमान को समर्पित है। वैसे तो साल का हर मंगलवार हनुमान जी की सेवा के लिए उत्तम माना जाता है, लेकिन ज्येष्ठ मास के मंगलवार का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने पड़ने वाले मंगलों को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से जाना जाता है। विशेषकर उत्तर भारत और लखनऊ जैसे शहरों में इसकी भव्यता देखते ही बनती है। साल 2026 में ज्येष्ठ मास के बड़े मंगलों की श्रृंखला शुरू हो चुकी है, और भक्त अब दूसरे बड़े मंगल की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कब है दूसरा बड़ा मंगल? (तिथि और शुभ मुहूर्त)
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को इस साल का दूसरा बड़ा मंगल मनाया जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार:
तारीख: दूसरा बड़ा मंगल 12 मई 2026 को पड़ रहा है।
- दशमी तिथि का प्रारंभ: 11 मई को दोपहर 03 बजकर 24 मिनट पर।
- दशमी तिथि का समापन: 12 मई को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर।
- विशेष: 12 मई को दोपहर 02:52 के बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, उदयातिथि में दशमी होने के कारण 12 मई को ही दूसरे बड़े मंगल का व्रत और पूजन करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
क्यों कहा जाता है इसे ‘बड़ा मंगल’?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही त्रेतायुग में भगवान हनुमान की मुलाकात भीम से हुई थी, जहाँ हनुमान जी ने भीम का गर्व चूर किया था। वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसी महीने में हनुमान जी पहली बार प्रभु श्री राम से मिले थे। ‘बड़ा मंगल’ शब्द का अर्थ है वह दिन जब हनुमान जी अपनी पूर्ण शक्ति और वृद्ध स्वरूप (बुढ़वा मंगल) में भक्तों के संकटों का नाश करते हैं। इस दिन की गई पूजा से न केवल बजरंगबली बल्कि श्री राम की कृपा भी प्राप्त होती है।
पूजन विधि: कैसे प्रसन्न करें पवनपुत्र को?
बड़े मंगल के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर या हनुमान मंदिर में जाकर बजरंगबली की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। भगवान को लाल फूल, सिंदूर, चमेली का तेल और अक्षत अर्पित करें। हनुमान जी को इस दिन तुलसी दल चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि तुलसी के बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है। पूजन के दौरान ‘हनुमान चालीसा’ या ‘बजरंग बाण’ का पाठ करें। यदि संभव हो तो ‘सुंदरकांड’ का पाठ करना जीवन के बड़े से बड़े संकट को टालने की शक्ति रखता है।
दान और भंडारे का विशेष महत्व
बड़ा मंगल केवल व्यक्तिगत पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और दान का भी पर्व है। इस दिन प्याऊ लगवाना, शरबत पिलाना और भंडारे का आयोजन करना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। ज्येष्ठ की भीषण गर्मी में राहगीरों को ठंडा पानी और भोजन उपलब्ध कराना हनुमान जी की सच्ची सेवा मानी गई है। भक्त इस दिन बूंदी के लड्डू, मालपुआ और चने का प्रसाद वितरित करते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से अन्न-धन का दान करता है, हनुमान जी उसके घर के भंडार हमेशा भरे रखते हैं।
बड़ा मंगल पर क्या करें और क्या न करें?
हनुमान जी की पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बड़े मंगल का व्रत रखने वाले जातकों को इस दिन नमक का सेवन करने से बचना चाहिए। साथ ही, मन में किसी के प्रति द्वेष या क्रोध न लाएं। ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है। इस दिन मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है। यदि आप मंदिर नहीं जा सकते, तो घर पर ही “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जाप करें। बंदरों को गुड़ और चना खिलाना भी इस दिन उत्तम फल प्रदान करता है।
संकटों से मुक्ति का मार्ग
आज की तनावपूर्ण जिंदगी में बड़ा मंगल हमें संयम और समर्पण की सीख देता है। 12 मई को पड़ने वाला दूसरा बड़ा मंगल उन लोगों के लिए विशेष है जिनके जीवन में शनि दोष या मंगल दोष के कारण बाधाएं आ रही हैं। हनुमान जी की शरण में जाने से मानसिक शांति तो मिलती ही है, साथ ही आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। तो आप भी इस पावन अवसर पर विधि-विधान से पूजन करें, दान करें और श्रद्धापूर्वक बजरंगबली का स्मरण करें। उनकी कृपा से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और जीवन मंगलमय होगा।
जय श्री राम! जय हनुमान!