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अगर आप सुबह बजरंगबली की पूजा नहीं कर पाए हैं, तो जानें शाम का शुभ मुहूर्त (Muhurat) और नियम। शाम की पूजा से मिलते हैं ये 5 अद्भुत लाभ
अक्सर कामकाज की व्यस्तता या यात्रा के कारण हम सुबह के समय अपनी नियमित पूजा नहीं कर पाते। विशेषकर मंगलवार या शनिवार के दिन, जब भक्त हनुमान जी की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, सुबह पूजा न कर पाने पर मन में संशय बना रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी को ‘सांध्य काल’ (शाम का समय) का देवता भी माना जाता है? शाम के समय की गई उनकी स्तुति मानसिक शांति और संकटों से मुक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
शाम को पूजा करने का शुभ मुहूर्त (Evening Muhurat)
हनुमान जी की शाम की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सूर्यास्त के बाद का माना जाता है।
- गोधूलि बेला: सूर्यास्त के 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय (शाम 5:30 से 7:30 के बीच) अत्यंत प्रभावशाली होता है।
- निशा काल: यदि आप किसी विशेष मनोकामना के लिए पाठ कर रहे हैं, तो रात 8:00 बजे से 9:00 बजे के बीच का समय भी बहुत शुभ है। इस समय हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से शनि और राहु जैसे ग्रहों के दोष भी शांत होते हैं।
शाम की पूजा की विधि (Evening Puja Vidhi)
शाम को पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
- शुद्धि: यदि आप ऑफिस या बाहर से आए हैं, तो स्नान अवश्य करें। यदि संभव न हो, तो हाथ-पैर और चेहरा धोकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- दीपक: हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का या शुद्ध घी का दीपक जलाएं। शाम के समय दीपक जलाना घर की नकारात्मकता को दूर करता है।
- भोग: शाम को गुड़-चने या बूंदी का भोग लगाना शुभ होता है। यदि कुछ उपलब्ध न हो, तो केवल मिश्री या फल का भोग भी लगा सकते हैं।
- पाठ: इस समय हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक या बजरंग बाण का पाठ करना सबसे उत्तम है।
शाम की पूजा के विशेष लाभ
- तनाव से मुक्ति: दिनभर की थकान और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए शाम की पूजा रामबाण है।
- ग्रह दोष निवारण: शाम के समय हनुमान जी की आराधना करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है।
- घर में सुख-शांति: शाम की आरती से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है