रंगभरी एकादशी 2026 पर गंगा स्नान और गंगा चालीसा का पाठ करें। इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी या आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 27 फरवरी 2026 को है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। साथ ही गंगा स्नान और दान करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
रंगभरी एकादशी के महत्व
रंगभरी एकादशी के दिन विशेष पूजा, व्रत और गंगा स्नान का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा नदी में स्नान करने और दान देने से साधक पर मां गंगा की कृपा बरसती है। साथ ही, इस दिन गंगा चालीसा का पाठ करना बेहद फलदायी माना जाता है।
गंगा चालीसा का पाठ करने से मन और शरीर को शांति मिलती है और सभी पापों का नाश होता है।
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गंगा चालीसा का महत्व
गंगा चालीसा का पाठ करने से साधक को जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इसमें दोहा और चौपाई के माध्यम से भगवान गंगा और उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। यह पाठ हर भक्त के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
मुख्य दोहे और चौपाई में शामिल हैं:
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जय जय जग पावनी, जयति देवसरि गंग।
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जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग।
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जय जय जननी हराना अघखानी, आनंद करनी गंगा महारानी।
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ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी, श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि।
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जो यह पढ़े गंगा चालीसा, मिले भक्ति अविरल वागीसा।
इस चालीसा के नियमित पाठ से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि साधक के जीवन में सफलता, सुख और समृद्धि भी आती है।