युद्ध नशे के विरुद्ध ; स्वास्थ्य मंत्री ने पंजाब को नशा मुक्त बनाने में मैडिकल पेशेवरो को सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की

युद्ध नशे के विरुद्ध ; स्वास्थ्य मंत्री ने पंजाब को नशा मुक्त बनाने में मैडिकल पेशेवरो को सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की*

– कहा, एम्स द्वारा तैयार किया गया पहला प्रशिक्षण प्रोग्राम का उदेश्य मैडिकल अधिकारियों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सशक्त बनाने का लक्ष्य

– पंजाब सरकार ने नशे के उन्मूलन के लिए डेटा विश्लेषण और तकनीकी सहायता यूनिट स्थापित की

जालंधर, 14 अगस्त: राज्य सरकार की प्रमुख पहल ‘ युद्ध नशे के विरुद्ध’ के तहत, पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने आज डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और नर्सिंग छात्रों सहित सभी मैडिकल पेशेवरों से नशा मुक्त पंजाब के सपने को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

वह पंजाब आयुर्विज्ञान संस्थान (पिमस ) में चिकित्सा अधिकारियों के लिए ‘ मैनेजमेंट ऑफ सब्सटेंस  उपयोग विकार के प्रबंधन’ पर पहली बार आयोजित प्रशिक्षण के समापन समारोह में बोल रहे थे।

कैबिनेट मंत्री ने मैडिकल पेशेवरों से अपील की कि वे प्रत्येक नशाग्रस्त व्यक्ति को गोद लें ताकि उनका पुनर्वास सुनिश्चित हो सके और मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के विजन के अनुरूप पंजाब को ‘नशा मुक्त-रंगला पंजाब’ बनाया जा सके।

इस प्रशिक्षण को एक प्रगतिशील पहल बताते हुए, डा. बलबीर सिंह ने कहा कि एम्स द्वारा तैयार और पंजाब सरकार द्वारा संशोधित यह प्रोग्राम सभी प्रकार के नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो चिकित्सा पेशेवरों को इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि ‘युद्ध नशे के विरुद्ध ‘ के तहत, मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने नशा विरोधी अभियान को और मज़बूत करने के लिए एक डेटा विश्लेषण और तकनीकी सहायता इकाई की स्थापना की है।

बुनियादी ढांचे में विकास पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि राज्य में अब नशा पीड़ितों के लिए 5,000 से अधिक बिस्तर हैं और 547 ओएटीएस क्लीनिक कार्यरत हैं, जो 10 लाख से अधिक पंजीकृत रोगियों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। डा.सिंह ने आगे कहा कि सरकार जल्द ही पूरे पंजाब में परामर्श सुविधाओं को बढ़ाने के लिए 243 मनोवैज्ञानिकों की भर्ती करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों को एक ही छत के नीचे एकीकृत किया जा रहा है, जबकि कौशल विकास प्रोग्रामों के माध्यम से 800 से अधिक नशा पीड़ितों को सफलतापूर्वक समाज की मुख्यधारा में जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि इस बहुआयामी रणनीति के परिणामस्वरूप पंजाब नशा मुक्त हो जाएगा।

कैबिनेट मंत्री ने भाग लेने वाले चिकित्सा अधिकारियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। इस अवसर पर एस.डी.एम. रणदीप सिंह हीर, सिविल सर्जन डॉ. गुरमीत लाल, पिमस के निदेशक, प्रिंसिपल डा.राजीव अरोड़ा और कई मैडिकल पेशेवर उपस्थित थे।

इससे पहले, पत्रकारों से बातचीत करते हुए, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार की नई स्वास्थ्य बीमा योजना से 65 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित होंगे, जिसके तहत प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने इस अनूठी पहल को राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया।

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