जिले के गांवों और शहरों में विकास को और बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन की अनूठी पहल

डिप्टी कमिश्नर द्वारा ‘विलेज/वार्ड चैंपियन’ प्रोग्राम की शुरुआत

 

 

 

जिले के गांवों और शहरों में विकास को और बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन की अनूठी पहल

 

 

 

विभिन्न मानदंडों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गांवों/वार्डों को मिलेगी विकास ग्रांट

 

 

 

सर्वश्रेष्ठ गांव/वार्ड को 4 लाख रुपये के विकास अनुदान से किया जाएगा सम्मानित

 

 

 

जालंधर, 9 अक्तूबर: लोगों की भागीदारी के साथ जिले के गांवों और शहरों में विकास को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने के उद्देश्य से गांवों/शहरी क्षेत्रों में वार्डों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने की अनूठी पहल के तहत पंजाब सरकार के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा गुरुवार को ‘विलेज/वार्ड चैंपियन’ प्रोग्राम की शुरुआत की गई।

 

 

 

डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने यहां जिला प्रशासकीय परिसर में इस कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम शासन, स्वच्छता, बुनियादी ढांचे और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले वार्डों/गांवों को प्रोत्साहित करने और सम्मानित करने के लिए शुरू किया जा रहा है। इस अवसर पर अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (शहरी विकास) जसबीर सिंह, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अमनिंदर कौर भी मौजूद थी।

 

 

 

उन्होंने बताया कि इस प्रोग्राम के तहत स्वच्छता, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण प्रबंधन, हरित पट्टी/पार्कों/मैदानों का रख-रखाव, सुचारू जल आपूर्ति और कार्यशील नल कनेक्शन, नशे का उन्मूलन, सरकारी योजनाओं में प्रदर्शन, वार्डों के रखरखाव में लोगों की भागीदारी, गांवों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए उपायों सहित विभिन्न मानदंडों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष तीन गांवों/वार्डों को विकास अनुदान से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सर्वश्रेष्ठ गांव/वार्ड को 4 लाख रुपये के विकास अनुदान से सम्मानित किया जाएगा। इसी तरह, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले गांवों/वार्डों को क्रमशः 2 लाख और 1 लाख रुपये के विकास अनुदान दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वार्ड की रैंकिंग मानदंडों के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित होगी।

 

 

 

डा. अग्रवाल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य वार्डवासियों, चुने हुए प्रतिनिधियों, गांव के समुदायों, पंचायत सदस्यों और स्थानीय संगठनों को स्वच्छ, सुरक्षित और अधिक समृद्ध वातावरण बनाने में सक्रिय रूप से काम करने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि वार्डों/गांवों के प्रदर्शन का मूल्यांकन शहरी क्षेत्र में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (शहरी विकास) और ग्रामीण क्षेत्र में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) की अध्यक्षता वाली समितियां करेंगी।

 

 

 

डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि यह पुरस्कार हर साल दो चरणों में दिया जाएगा। पहले चरण में मूल्यांकन अवधि 1 अगस्त से 31 दिसंबर तक होगी और इस अवधि के लिए पुरस्कार 26 जनवरी को घोषित किया जाएगा। दूसरे चरण की मूल्यांकन अवधि 1 फरवरी से 30 जून तक होगी और इस अवधि के लिए पुरस्कार 15 अगस्त को घोषित किया जाएगा।

 

 

 

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि नए गांवों/वार्डों को हर साल उत्कृष्ट प्रदर्शन दिखाने का अवसर मिल सके, दो साल की ‘कूलिंग ऑफ’ अवधि लागू की जाएगी, यानी विजेता गांव/वार्ड अगले दो साल तक इस पहल में भाग लेने के योग्य नहीं होगा।

 

 

 

डिप्टी कमिश्नर ने बैठक में मौजूद सभी बी.डी.पी.ओ. और ई.ओ. को निर्देश दिया कि अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले गांवों और वार्डों में इस पहल के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाई जाए ताकि अधिक से अधिक लोग, जन प्रतिनिधि, पंचायतें गांवों और शहरों की सूरत बदलने में योगदान दे सकें।

 

 

 

 

बैठक में सहायक कमिश्नर (यू.टी.) मुकिलन आर, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम मंदीप कौर, डिप्टी सी.ई.ओ. जिला परिषद सुखबीर कौर, जिला राजस्व अधिकारी नवदीप भोगल के अलावा सभी बी.डी.पी.ओ. और ई.ओ. भी मौजूद थे।

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