अमरीका-ईरान युद्ध के बीच केंद्र सरकार प्रभावित क्षेत्रों को बचाने के लिए 2.5 लाख करोड़ का राहत पैकेज ला सकती है। एयरलाइंस के लिए 5,000 करोड़ की विशेष ऋण सुविधा प्रस्तावित है।
अमरीका-ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक व्यापार व्यवधानों को देखते हुए केंद्र सरकार प्रभावित क्षेत्रों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। ‘एनडीटीवी’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार 2.5 लाख करोड़ रुपये के एक विशाल क्रेडिट-सपोर्ट (ऋण सहायता) ढांचे पर विचार कर रही है, जिसे आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) के तहत पेश किया जा सकता है।
अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक व्यापार मार्ग, विशेषकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में बड़ी अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ा है। इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर विमानन (Aviation) क्षेत्र के लिए एक विशेष वित्तीय सहायता खिड़की खोलने पर विचार कर रही है।
एयरलाइंस के लिए 5,000 करोड़ का विशेष कोटा
रिपोर्ट के अनुसार, इस राहत पैकेज का एक मुख्य हिस्सा एयरलाइंस के लिए होगा। सरकार विमानन कंपनियों के लिए 5,000 करोड़ रुपये की समर्पित फाइनेंसिंग विंडो बनाने पर चर्चा कर रही है।
- ऋण सीमा: प्रत्येक एयरलाइन को ECLGS चैनल के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये तक उधार लेने की अनुमति मिल सकती है।
- सरकारी गारंटी: केंद्र सरकार स्वीकृत राशि के 90 प्रतिशत तक की क्रेडिट गारंटी प्रदान कर सकती है, ताकि बैंक अनिश्चितता के इस दौर में ऋण देने के लिए प्रोत्साहित हों।
- अवधि: इस सुविधा के लिए पांच साल का कार्यकाल प्रस्तावित किया जा सकता है।
ECLGS का दोबारा उपयोग: क्या है यह योजना?
ECLGS योजना को मूल रूप से 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान नकदी के संकट से जूझ रहे व्यवसायों की मदद के लिए शुरू किया गया था। इसके तहत सरकार की गारंटी पर बिना किसी गारंटी (Collateral-free) के ऋण मिलता है, जिसमें ब्याज दरें कम और पुनर्भुगतान की शर्तें आसान होती हैं। अब सरकार इसी मॉडल का उपयोग युद्ध के कारण प्रभावित हुए उद्योगों को बचाने के लिए करना चाहती है।
शेयर बाजार और उद्योगों पर युद्ध का साया
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के महीने में भू-राजनीतिक झटकों के कारण शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। 400 से अधिक शेयरों में दोहरे अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसका सबसे अधिक दबाव तेल से जुड़ी कंपनियों, एयरलाइंस, ऑटोमोबाइल, कपड़ा उद्योग, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर पड़ा है। कच्चा तेल और हवाई ईंधन (ATF) महंगा होने से कंपनियों की लाभप्रदता पर सीधा असर पड़ रहा है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का महत्व और ईरान का प्रस्ताव
भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का खुला रहना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए आयातित तेल पर निर्भर है। इस मार्ग में कोई भी अवरोध पूरी अर्थव्यवस्था में लागत बढ़ा सकता है। इसी बीच ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अमरीका को हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।