वीवर्क इंडिया 3 से 7 अक्टूबर के बीच 3000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आईपीओ लॉन्च करेगी। जानिए आईपीओ की तारीख, उद्देश्य और कंपनी का विस्तार।
वीवर्क इंडिया (WeWork India) भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारियों में जुटी है। कंपनी 3 से 7 अक्टूबर के बीच अपने आईपीओ (IPO) के माध्यम से निवेशकों से निवेश आमंत्रित करेगी। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए 1 अक्टूबर को सबस्क्रिप्शन की शुरुआत होगी। इस आईपीओ के जरिए वीवर्क इंडिया लगभग 3000 करोड़ रुपये जुटाने का प्रयास करेगी। हालांकि, कंपनी ने अभी तक प्राइस बैंड की घोषणा नहीं की है।
आईपीओ का खास पहलू: ऑफर फॉर सेल
वीवर्क इंडिया का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) बताता है कि यह आईपीओ ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, यानी कंपनी को इस आईपीओ से सीधे कोई नया पूंजी (कैपिटल) नहीं मिलेगा। मौजूदा निवेशक अपनी 4.63% हिस्सेदारी बेचेंगे। इसका मतलब है कि आईपीओ से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी की ग्रोथ या विस्तार के लिए नहीं होगा।
उद्देश्य: कंपनी की विजिबिलिटी और लिक्विडिटी बढ़ाना
ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट के अनुसार, वीवर्क इंडिया आईपीओ लाने का मुख्य मकसद अपनी इक्विटी शेयरों को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराना है। इससे कंपनी की मार्केट में पहचान बढ़ेगी और मौजूदा शेयरहोल्डर्स को अपनी हिस्सेदारी बेचने में आसानी होगी। इसके अलावा, भारत में कंपनी के शेयर के लिए पब्लिक मार्केट भी स्थापित होगा।
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वीवर्क इंडिया का भारत में विस्तार
वीवर्क ग्लोबल ने 2021 में अपनी भारतीय इकाई में 100 मिलियन डॉलर का निवेश किया था। 2024 में कंपनी ने अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये का फंड रेज किया। फिलहाल, वीवर्क इंडिया बेंगलुरू, पुणे, हैदराबाद, नोएडा, मुंबई, गुरुग्राम, दिल्ली और चेन्नई में सक्रिय है।
वीवर्क इंडिया क्या करती है?
वीवर्क इंडिया भारत की प्रमुख प्रीमियम फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस प्रदाता कंपनियों में से एक है। यह कंपनी स्टार्टअप्स, मीडियम से लेकर बड़ी कंपनियों तक को फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सॉल्यूशन प्रदान करती है। कंपनी वर्तमान में 77 लाख स्क्वायर फीट का क्षेत्र प्रबंधित करती है, जिसमें से 70 लाख स्क्वायर फीट ऑपरेशनल है। कंपनी की डेस्क क्षमता 1.03 लाख से अधिक है और यह 500 कर्मचारियों की टीम के साथ काम करती है। वीवर्क इंडिया अपने शेयर बीएसई और एनएसई दोनों पर लिस्ट करेगी।
ग्रे मार्केट में शेयरों की स्थिति
हालांकि, ग्रे मार्केट में वीवर्क इंडिया के शेयर अभी फ्लैट ट्रेड कर रहे हैं, यानी किसी प्रकार का प्रीमियम या डिस्काउंट नजर नहीं आ रहा है। निवेशकों की नजरें अब आईपीओ के रियल प्राइस बैंड और सबस्क्रिप्शन पर टिकी हैं।