वर्ल्ड बुक डे: ट्विंकल खन्ना के बेबाक विचार और लेखन का सफर
By Bhawna
ट्विंकल खन्ना का मानना है कि उनका काम लोगों को नाराज करना नहीं, बल्कि उन्हें उन चीजों पर विचार करने के लिए मजबूर करना है जिन्हें सामाजिक कंडीशनिंग की वजह से हम देख नहीं पाते।
अपनी किताबों के जरिए ट्विंकल न केवल पाठकों की, बल्कि खुद की कंडीशनिंग की परतों को भी हटाने की कोशिश करती हैं। वे लिखती हैं ताकि जीवन का रास्ता बेहतर समझ सकें
ट्विंकल मजाकिया लहजे में कहती हैं कि वे 'हिट' (Hit) की केन लेकर कॉकरोच भगाने नहीं निकलतीं, लेकिन कभी-कभी कड़वा सच लोगों को असहज जरूर कर देता है।
सेनेटरी पैड्स और वियाग्रा पर टैक्स को लेकर दिया गया उनका एक बयान काफी चर्चा में रहा था, जिसने उम्रदराज नीति-निर्माताओं की सोच पर सवाल उठाए थे।
उनके एक पुराने बयान की वजह से कुछ राजनेता फिल्म 'पैडमैन' के प्रीमियर में शामिल नहीं हुए थे, क्योंकि उन्हें लगा कि 65 साल की उम्र वाली टिप्पणी उन पर निशाना थी।
एक अभिनेत्री से सफल लेखिका बनने तक के सफर में ट्विंकल का मानना है कि किताबें और सिनेमा दोनों ही उनके जीवन के अभिन्न अंग रहे हैं।
बचपन और अभिनय के दिनों में देखी गई स्त्री-पुरुष की असमानताओं ने उनके लेखन को गहराई दी है, जिसे उन्होंने जीवन के उत्तरार्ध में बेहतर ढंग से समझा।
वर्ल्ड बुक डे पर ट्विंकल खन्ना का यह नजरिया हमें दुनिया को एक नई और सूक्ष्म दृष्टि से देखने के लिए प्रेरित करता है, जहाँ अंतर्दृष्टि और हास्य का अनूठा संगम है।