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उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। एनडीए ने महाराष्ट्र के वर्तमान राज्यपाल और भाजपा के वरिष्ठ नेता सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और गोवा के पूर्व लोकायुक्त सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है। इस चुनाव में सांसदों का संख्या बल और समर्थन किस ओर है, यह जीत का बड़ा संकेतक माना जा रहा है।
लोकसभा और राज्यसभा में स्थिति क्या है?
संसद की कुल 782 सीटों में से उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 392 वोट हासिल करना जरूरी है। वर्तमान में लोकसभा में एनडीए के पास 293 सांसद हैं, जबकि विपक्ष के पास 234 सांसद और अन्य छोटे दलों के 15 सांसद हैं। वहीं, राज्यसभा में कुल 240 सांसदों में एनडीए के पास लगभग 134 सांसदों का समर्थन है, जबकि विपक्ष के साथ अन्य दलों के कुल 106 सांसद हैं। इससे सत्ता पक्ष के कुल 427 वोट होते हैं, जो बहुमत से 35 ज्यादा हैं, जबकि विपक्ष के पास केवल 312 वोट हैं।
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विपक्ष की चुनौती और संभावनाएं
विपक्ष ने सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर यह संदेश दिया है कि यह चुनाव सिर्फ संख्या बल का नहीं बल्कि नैतिकता और विचारधारा का भी है। सुदर्शन रेड्डी की साख उनके सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और लोकायुक्त के रूप में सख्त और ईमानदार छवि पर आधारित है। विपक्ष को उम्मीद है कि दक्षिण भारत की टीडीपी और वाईएसआरसीपी जैसे दल उनके समर्थन से मुकाबला मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, संख्या बल की कमी विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन की मजबूती
सी.पी. राधाकृष्णन का अनुभव और संगठनात्मक नेतृत्व उन्हें एनडीए का मजबूत उम्मीदवार बनाता है। वे महाराष्ट्र के वर्तमान राज्यपाल हैं और इससे पहले झारखंड के राज्यपाल तथा तेलंगाना और पुडुचेरी के उपराज्यपाल भी रह चुके हैं। उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ और एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत के कारण उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
पिछले चुनाव का रुख
अगस्त 2022 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे, जबकि विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को केवल 182 वोट मिले थे। इस बार भी इसी तरह सत्ता पक्ष के पक्ष में वोटिंग के संकेत मिल रहे हैं।