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VB-G RAM G अधिनियम के तहत उत्तराखंड में ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण और आपदा प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। हिमालयी राज्यों को 90% वित्तीय सहायता।
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G अधिनियम) अब उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। केंद्र सरकार इस योजना के तहत हिमालयी राज्यों को 90% वित्तीय सहायता प्रदान करेगी, जिससे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तेजी से होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने योजना को बताया ऐतिहासिक
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस योजना को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह केवल मनरेगा का नाम बदलना नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति की संरचनात्मक पुनर्रचना है। उनका कहना था कि यह अधिनियम किसानों को सुरक्षा, श्रमिकों को रोजगार, महिलाओं को सम्मान और गांवों के समग्र विकास में मदद करेगा।
125 दिन का रोजगार और बेरोजगारी भत्ता
VB-G RAM G अधिनियम अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिन का रोजगार प्रदान करेगा, जो पहले के 100 दिनों से 25% अधिक है। यदि किसी को 15 दिन में काम नहीं मिलता, तो बेरोजगारी भत्ता अनिवार्य रूप से दिया जाएगा। भुगतान साप्ताहिक होगा और विलंब होने पर मुआवजा भी सुनिश्चित किया गया है।
तकनीक आधारित पारदर्शिता
इस योजना में भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी कामकाज सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी, जीओ-टैगिंग, जीआईएस मैपिंग, मोबाइल ऐप, सार्वजनिक डैशबोर्ड, AI-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन और साल में दो बार अनिवार्य सोशल ऑडिट जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जाएगा।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संरक्षण
किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए योजना के काम बुवाई और कटाई के मौसम में 60 दिन तक रोके जा सकते हैं, जिससे खेती प्रभावित नहीं होगी और मजदूरों की कमी नहीं होगी। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने में मदद करेगा।
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ग्राम पंचायत और ग्राम सभा को सशक्त बनाने पर जोर
VB-G RAM G अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत और ग्राम सभा को विकास कार्यों का निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। कम से कम 50% कार्य सीधे ग्राम पंचायत के स्तर पर संपन्न होंगे। योजना निर्माण, जॉब कार्ड, पंजीकरण जैसी प्रक्रियाएं स्थानीय स्तर पर तय की जाएंगी।
काम की गुणवत्ता और उपयोगिता
इस योजना में जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आपदा प्रबंधन और आजीविका परिसंपत्तियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें तालाब, चेकडैम, स्टॉपडैम, सड़क, नाली, स्कूल, अस्पताल, SHG शेड, स्किल सेंटर, ग्रामीण हाट, रिटेनिंग वॉल और ड्रेनेज जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस
महिलाओं के लिए रोजगार और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूह, स्किल सेंटर, शेड निर्माण और ग्रामीण हाट जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। ग्राम रोजगार सहायक, फील्ड असिस्टेंट और तकनीकी सहायक योजना की रीढ़ होंगे। प्रशासनिक खर्च 6% से बढ़ाकर 9% किया गया है, जिससे प्रशिक्षण, मानदेय और निगरानी में सुधार होगा।
हिमालयी राज्यों के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान
हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों को 90:10 के अनुपात में वित्तीय सहयोग मिलेगा, जबकि अन्य राज्यों के लिए यह 60:40 रहेगा। इससे उत्तराखंड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य को प्रभावी और तेजी से ग्रामीण विकास करने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड के लिए महत्व
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य में यह योजना जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण अवसंरचना में अहम भूमिका निभाएगी। SBI के विश्लेषण के अनुसार, इस अधिनियम से राज्यों को लगभग 17,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होने की संभावना है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य में भूस्खलन, जलभराव और बादल फटने जैसी आपदाओं के मद्देनजर यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।