Vaishakh Month 2025: वैशाख की शुरुआत, जानें इसके महत्व और नियम

Vaishakh Month 2025: वैशाख की शुरुआत, जानें इसके महत्व और नियम

Vaishakh Month 2025: पद्म पुराण में बताया गया है कि ब्रह्मा ने देवताओं से कहा, “त्रैलोक्य में वैशाख मास से श्रेष्ठ कोई मास नहीं है।”

Vaishakh Month 2025: सनातन धर्म में बारह मासों का खास धार्मिक महत्व है, जिनमें वैशाख मास सबसे महत्वपूर्ण है। पुराणों में पुण्य, तप, दान और सेवा का महीना चैत्र के बाद आता है। इसकी महिमा को स्कंद पुराण, पद्म पुराण और नारद पुराण में व्याख्यायित किया गया है। इसे ‘मासोत्तम’ (मासों में सर्वश्रेष्ठ) कहा जाता है। इस महीने को माधव मास भी कहा जाता है, और इसमें श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। यह भी कहा जाता है कि वैशाख का मास सभी महीनों में सर्वश्रेष्ठ होता है।

वैशाख महीने की धार्मिक मान्यता

पद्म पुराण में बताया गया है कि ब्रह्मा ने देवताओं से कहा, “त्रैलोक्य में वैशाख मास से श्रेष्ठ कोई मास नहीं है।” इसमें किया गया एक जलदान भी अश्वमेध यज्ञ की तुलना में उतना ही लाभदायक होता है। इस महीने में जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक शुभ कार्य करता है, वह मोक्ष का अधिकारी होगा। कृष्ण ने युधिष्ठिर को भी उपदेश दिया कि वैशाख मास में प्रातःकाल तीर्थों में स्नान, व्रत रखने और दान करने से सभी पाप दूर हो जाते हैं और विष्णुलोक में प्रवेश करते हैं। विशेष रूप से इस महीने की एकादशी, अक्षय तृतीया, पूर्णिमा और अमावस्या के पर्व बहुत शुभ माने जाते हैं।

वैशाख के नियम

वैशाख मास सिर्फ त्योहारों का महीना नहीं है; यह आत्मसंयम और साधना का महीना भी है। इस महीने कुछ नियमों का पालन करने से व्यक्ति शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और आत्मिक रूप से शुद्ध होगा।

ब्राह्ममुहूर्त में स्नान: ब्रह्ममुहूर्त पर स्नान करना सूर्योदय से पहले गंगा, यमुना, नर्मदा आदि नदियों में स्नान करना बहुत पुण्यपूर्ण है। यदि संभव न हो तो सूर्योदय से पूर्व घर में स्नान करें।

व्रत और उपवास: उपवास और व्रत इस महीने के पर्वों, जैसे एकादशी, अक्षय तृतीया और पूर्णिमा, पर उपवास रखें, सात्त्विक भोजन करें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।

दान और सेवा: दान में अन्न, कपड़े, जल, छाता, पंखा, गुड़, चप्पल, जल से भरे घड़े और गौ शामिल हैं। भूखों को भोजन देना, प्यासों को जल देना और भूखों को भोजन करना बहुत पुण्यकारी है।

सात्त्विक जीवनशैली: एक सात्त्विक जीवनशैली का पालन करना इस महीने मांस, मदिरा, तामसिक भोजन, झूठ, निंदा, क्रोध और द्वेष से दूर रहें। संतुलित भोजन करें।

भगवत भक्ति और पाठ: विशेष लाभदायक हैं भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णुसहस्रनाम का पाठ, तुलसी की सेवा, दीपक जलाना और श्रीमद्भागवत का श्रवण।

ब्राह्मण सेवा: ब्राह्मणों को यथाशक्ति भोजन दें, दक्षिणा दें, धार्मिक ग्रंथों को वितरित करें या धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करें।

वृक्षारोपण और गौसेवा: इस महीने में पेड़ लगाना, जल संरक्षण करना और गौसेवा करना भी विशेष पुण्यदायी है।

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