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उत्तराखंड में UCC लागू हुए एक वर्ष पूरे, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता से महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय पर गौरव व्यक्त किया।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हुए एक वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गौरव व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कानून समाज में समानता, सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण सुनिश्चित करता है, और हलाला, बहुविवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने में मदद करता है।
मंगलवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर, गढ़ी कैंट में आयोजित प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि UCC की घोषणा से लेकर प्रभावी क्रियान्वयन तक यह उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कानून को तैयार करने वाली समिति, प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानित किया।
UCC से मिली नई दिशा
सीएम धामी ने बताया कि UCC लागू होने से राज्य में विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बीते वर्ष में 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95% का निस्तारण किया जा चुका है। इसके अलावा, 30% से अधिक ग्राम पंचायतों में सभी दंपतियों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।
उन्होंने कहा कि यह कानून धर्म या परंपरा के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज की कुप्रथाओं को खत्म कर समानता और समरसता स्थापित करने का प्रयास है। विवाह, विवाह-विच्छेद और उत्तराधिकार से संबंधित नियम सभी धर्मों के लिए समान किए गए हैं।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय
सीएम ने जोर देकर कहा कि UCC से उत्तराखंड की मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह और तीन तलाक जैसी प्रथाओं से मुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि अब राज्य में इन कुरीतियों के कोई मामले सामने नहीं आए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कानून में लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है और यह पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। लिव-इन संबंधों में जन्मे बच्चों को समान अधिकार दिए गए हैं।
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संवैधानिक दृष्टि और ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं, विशेषकर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, ने समान नागरिक संहिता को संविधान के अनुच्छेद 44 में शामिल किया। उनका लक्ष्य था कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हो।
सीएम ने यह भी बताया कि 2024 में विधानसभा से पारित विधेयक और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में UCC लागू किया गया।
सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और सख्ती
सीएम धामी ने बताया कि UCC के लागू होने के बाद सरकारी सेवाओं की पहुंच सरल, सुलभ और पारदर्शी हुई है। विवाह में धोखाधड़ी या गलत सूचना देने पर विवाह को निरस्त करने के प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, बल या दबाव के माध्यम से विवाह या लिव-इन संबंध बनाने पर कठोर दंड सुनिश्चित किया गया है।
देश के लिए प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की UCC अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज में समान अधिकार और मानवाधिकार सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है।
सीएम ने यह भी बताया कि बहुविवाह और विवाह-विच्छेद से संबंधित मामलों में सख्ती बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कानून देश में समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोग
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डा. धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सविता कपूर, सचिव गृह शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, और UCC समिति के सदस्य सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।