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UKSSSC पेपर लीक मामले में सरकार की कोशिशें, युवाओं का आंदोलन और सीबीआई जांच की घोषणा। मुख्यमंत्री धामी की पहल से आंदोलन खत्म, युवाओं को मिली राहत।
UKSSSC पेपर लीक मामले ने प्रदेश में बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। सरकार इस आंदोलन को शांत करने के लिए लगातार प्रयास करती रही, जबकि युवा वर्ग अपनी मांगों को लेकर अडिग था। देहरादून से शुरू हुआ यह आंदोलन अब गढ़वाल और कुमाऊं तक फैल चुका था। आंदोलन के पहले दिन से ही युवा इसे पेपर लीक मानकर, सीबीआई जांच की मांग करने लगे थे, लेकिन धीरे-धीरे सरकार की ओर से उठाए गए कदमों ने स्थिति को सुलझाने की दिशा में काम किया।
आंदोलन की शुरुआत और सरकार की प्रतिक्रिया
21 सितंबर को बेरोजगार संघ ने यूकेएसएससी परीक्षा के पेपर लीक होने का आरोप लगाते हुए सरकार से परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग की थी। मामले में जांच शुरू करते हुए, एसटीएफ और देहरादून एसएसपी ने पहले दिन ही कहा था कि यह एक पेपर लीक नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्र पर हुई एक कारगुजारी थी। हालांकि, बेरोजगार संघ ने इसे पेपर लीक मानते हुए पहले ही दिन सचिवालय कूच करने का ऐलान कर दिया।
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आंदोलन का विस्तार और मुख्यमंत्री की पहल
22 सितंबर को आंदोलनकारी युवाओं की बड़ी संख्या ने परेड ग्राउंड में आकर सचिवालय कूच करने का मन बनाया। पहले तो यह लगा कि मामला शांत हो जाएगा, लेकिन युवा अपनी मांगों पर कायम रहे। अगले दिन से यह आंदोलन प्रदेशव्यापी हो गया, और इसका असर गढ़वाल और कुमाऊं के जिलों तक फैलने लगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आंदोलनकारियों से संवाद की कोशिश की, लेकिन युवाओं का रुख बदलने का नाम नहीं ले रहा था। सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बावजूद, युवाओं की मांग थी कि सीबीआई जांच की जाए।
सीएम धामी का कड़ा कदम और सीबीआई जांच की घोषणा
प्रदेशभर में हो रहे विरोध के बाद, मुख्यमंत्री धामी ने अंततः युवाओं के बीच जाकर सीबीआई जांच की घोषणा की। यह कदम ऐसे समय में लिया गया जब सरकार युवाओं को संतुष्ट करने के लिए सभी प्रयासों में जुटी थी। इस घोषणा से युवाओं की मांग पूरी हुई और आंदोलन का रुख शांत हुआ।
आखिरकार, यह साबित हो गया कि जब सरकार और युवाओं के बीच संवाद का रास्ता खुलता है, तो हल निकल ही आता है। सीबीआई जांच की घोषणा के साथ ही, प्रदेश में फैल रहे इस आंदोलन का अंत हुआ।