Tulsi Puja in Jyeshtha Month: ज्येष्ठ माह में तुलसी पूजा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय गर्मी के कारण तुलसी का पौधा जल्दी सूखने लगता है। ऐसे में तुलसी की उचित देखभाल जरूरी हो जाती है।
Tulsi Puja in Jyeshtha Month: हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा विशेष पूजनीय माना गया है और लगभग हर घर में इसे पूजा जाता है। ज्येष्ठ माह में तुलसी पूजा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय गर्मी के कारण तुलसी का पौधा जल्दी सूखने लगता है। ऐसे में तुलसी की उचित देखभाल जरूरी हो जाती है।
मान्यता है कि तुलसी माता लक्ष्मी का स्वरूप होती हैं और जिस घर में तुलसी का हरा-भरा पौधा होता है तथा उसकी नियमित पूजा होती है, वहां मां लक्ष्मी का वास बना रहता है। साथ ही, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक समस्याएं दूर रहती हैं।
ज्येष्ठ में तुलसी पूजा की विधि:
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प्रतिदिन सुबह तुलसी पर जल अर्पित करें।
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घी का दीपक जलाएं और “ॐ तुलस्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
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तुलसी की 3 परिक्रमा करें (महिलाएं एक समय में तुलसी को स्पर्श न करें, विशेष दिनों पर ध्यान दें)।
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सायंकाल दीपदान करने से घर में लक्ष्मी निवास करती हैं।
अगर गर्मी के कारण आपके घर की तुलसी सूख रही है, तो इन आसान उपायों को अपनाकर आप उसे फिर से हरा-भरा बना सकते हैं:
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मिट्टी में सूखा गाय का गोबर मिलाकर तुलसी का पौधा लगाएं। यह पौधे की वृद्धि के लिए बहुत फायदेमंद होता है और इससे तुलसी हर मौसम में हरी-भरी बनी रहती है। नई पत्तियां भी जल्दी आने लगती हैं।
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अगर तुलसी का पौधा पूरी तरह से सूख चुका है, तो उसे फेंकें नहीं। उसकी जड़ों को पीले कपड़े में बांधकर घर के मुख्य दरवाजे पर टांग दें। यह शुभ माना जाता है।
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तुलसी की सूखी टहनियों को गंगाजल में डुबोकर रखें और उस जल का उपयोग घर में छिड़काव के लिए करें। इससे वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मकता बनी रहती है।
निष्कर्ष: ज्येष्ठ माह में तुलसी की देखभाल थोड़ा और ध्यान से करने की आवश्यकता होती है। इन पारंपरिक उपायों को अपनाकर आप तुलसी के पौधे को न केवल जीवनदान दे सकते हैं, बल्कि घर में शुभता और समृद्धि भी बनाए रख सकते हैं।