Tariff On USA: भारत ने WTO में अमेरिका के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जिसमें अमेरिकी ऑटोमोबाइल टैरिफ के जवाब में भारत ने जवाबी टैरिफ लगाने की योजना बनाई है। जानिए इसके असर और अगले कदमों के बारे में।
Tariff On USA: भारत ने शुक्रवार को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अमेरिका के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें अमेरिका द्वारा ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगाए गए 25% के टैरिफ के जवाब में भारत ने जवाबी टैरिफ लगाने का निर्णय लिया। यह कदम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के आधार पर भारत से आयात होने वाले ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स पर लगाए गए टैरिफ के प्रतिकार स्वरूप उठाया गया है।
भारत ने WTO में अमेरिका के खिलाफ क्या प्रस्ताव रखा?
भारत ने WTO के वस्तु व्यापार परिषद को सूचित किया कि वह अमेरिका से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कुछ अन्य रियायतों और दायित्वों में कटौती करेगा, ताकि अमेरिकी टैरिफ का असर भारतीय निर्यात पर कम किया जा सके।
अमेरिका ने क्यों लागू किया था ये टैरिफ?
इस साल 26 मार्च को, अमेरिका ने भारत से आने वाले ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स पर 25% का टैरिफ लगा दिया था। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि यह कदम अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने और अमेरिकी बाजार में विदेशी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा को कम करने के लिए लिया गया था। उनका तर्क था कि यह ‘सेफगार्ड’ उपाय था, ताकि अमेरिकी उद्योग राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से खुद को मजबूत बना सके।
भारत का जवाब: WTO समझौतों के तहत असहमति
भारत का कहना है कि अमेरिका का यह कदम 1994 के GATT (व्यापार और शुल्क पर सामान्य समझौता) और सुरक्षा समझौते के तहत उचित नहीं है। इसके अलावा, भारत ने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका ने भारत से इस मामले में उचित परामर्श नहीं किया, जैसा कि आर्टिकल 12.3, AoS में अनिवार्य है। भारत ने यह अधिकार सुरक्षित किया है कि वह आर्टिकल 8, AoS के तहत रियायतों को निलंबित कर सकता है।
ट्रंप का टैरिफ क्या-क्या चीजों पर लागू है?
ट्रंप के द्वारा लगाए गए 25% टैरिफ में हल्के ट्रक, कार, लिथियम-आयन बैटरी, टायर, स्पार्क प्लग वायर, शॉक एब्जॉर्बर, इंजन और ट्रांसमिशन जैसी प्रमुख वस्तुएं शामिल हैं। हालांकि, इन विनियमों का रजिस्ट्रेशन WTO में नहीं कराया गया है, जिससे यह मामला और विवादित हो सकता है।
भारत का संकल्प: व्यापार संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम
भारत ने यह स्पष्ट किया है कि वह WTO के तहत अपने अधिकारों का पूरी तरह से पालन करेगा और अमेरिकी व्यापार नीति के खिलाफ उचित कदम उठाएगा। यह कदम भारत के व्यापारिक हितों की रक्षा करने के लिए आवश्यक था, खासकर जब भारत पहले से ही अमेरिका से आयात होने वाले सामानों पर 26% टैरिफ के कारण दबाव में था।
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