Shani Jayanti 2025: नवग्रहों में न्याय का प्रतीक मानने वाले शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को हुआ था, जिसे श्रद्धापूर्वक शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में शनि देव सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं।
Shani Jayanti 2025: हिंदू धर्म और ज्योतिष में शनि देव का बहुत महत्व है। नवग्रहों में न्याय का प्रतीक मानने वाले शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को हुआ था, जिसे श्रद्धापूर्वक शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न केवल शनि महाराज की कृपा पाने का अवसर है, बल्कि साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि की प्रतिकूल दृष्टि से छुटकारा पाने का उत्तम समय भी है।
तेल दान और छाया दान
शनि जयंती पर छाया दान बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें सरसों का तेल एक कांसे या लोहे की कटोरी में डालकर पहले स्वयं का प्रतिबिंब देखा जाता है। यह विधि छाया दान कहलाती है और शनि दोष को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। इसके बाद तेल और तेल को किसी गरीब को दान या शनि मंदिर में अर्पित किया जाता है। ऐसा करने से जीवन में आने वाले अवरोध धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं।
शनि दोष को दूर करने के लिए विशिष्ट दान
शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित लोगों को शनि जयंती के दिन कुछ खास चीजें देनी चाहिए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं काले वस्त्र, सरसों का तेल, काले तिल, काले चने, उड़द की दाल, लोहा और भोजन का दान। यह दान शनि की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं और कुंडली में शनि की स्थिति को संतुलित करते हैं। यह भी कहा जाता है कि इस दिन गरीबों की सेवा करने वाले व्यक्ति को शनि देव की विशेष कृपा मिलती है।
शनि मंत्र जाप और व्रत
शनिवार से हर शनिवार को कम से कम 108 बार ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें। यह मंत्र शनि देव को प्रसन्न करने में बहुत प्रभावी है। शनि की आरती, चालीसा और स्तोत्र पढ़ने से भी अद्भुत लाभ मिलता है। यदि संभव हो तो इस दिन व्रत रखकर शनिदेव की पूजा करें। मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं से छुटकारा पाने में यह व्रत कारगर है।
शिव और हनुमान की पूजा
शिव भगवान शनि देव हैं। काले तिल को जल में मिलाकर शनि जयंती के दिन शिवलिंग को जलाभिषेक करें और महामृत्युंजय मंत्र या ॐ नम: शिवाय का जाप करें। इससे शनि के दोष दूर होते हैं। साथ ही, साथ ही शनि देव हनुमान जी के परम भक्त हैं और उनके पूजन से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की पूजा, सुंदरकाण्ड या हनुमान चालीसा भी करें। यह शनि के दंड से बचाता है।
पीपल और शमी की पूजा
ज्योतिषियों का कहना है कि पीपल और शमी वृक्षों का प्रत्यक्ष संबंध शनि ग्रह से है। शनि जयंती के दिन या प्रत्येक शनिवार को पीपल या शमी के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करना, तिल के तेल का दीपक जलाना और उसकी सात परिक्रमा करना बहुत शुभ है। इस उपाय से शनि का बुरा प्रभाव और जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
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