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Saturday Astro Remedies: शनि, सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल वाले ग्रह हैं, इसलिए लंबे समय तक व्यक्ति पर उसका प्रभाव रहता है।
Saturday Astro Remedies: शनि को कर्मफलदाता कहा जाता है क्योंकि वह सभी जातकों को कर्म के आधार पर फल देते हैं। वह भी न्याय-संघर्ष का कारक हैं। कुंडली में सही स्थिति नहीं होने पर व्यक्ति बीमार हो जाता है, संघर्ष करता है और मानसिक तनाव झेलता है। ज्योतिषियों के अनुसार, शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल चलता है, इसलिए लंबे समय तक व्यक्ति पर उनके शुभ-अशुभ प्रभाव रहते हैं। वर्तमान में मीन राशि में शनि है। यह राशि कुंभ, मेष और मीन राशि वालों पर साढ़ेसाती का साया डालता है। इस समय शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण मेष में, दूसरा मीन में और अंतिम कुंभ में चल रहा है। माना जाता है कि साढ़ेसाती होने पर काम और व्यवसाय में बाधा आने लगती है। इसके अलावा व्यक्तिगत, आर्थिक और शारीरिक समस्याएं जारी रहती हैं। शनिवार को ‘दशरथकृत शनिस्तोत्र’ का पाठ करना फायदेमंद हो सकता है। इससे साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है और शनिदेव खुश होते हैं। इसके बारे में जानें।
दशरथकृत शनि स्तोत्र
नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:।।
नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।
नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते।।
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।
नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च।।
अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तुते।।
तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।
देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समूलत:।।
प्रसाद कुरु मे सौरे वारदो भव भास्करे।
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल:।।
शनिदेव के प्रमुख मंत्र
जानिए शनिदेव की पूजा करते वक्त किन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है.
शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।
शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।
शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।
शनि पीड़ाहर स्तोत्र
सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: ।
दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ।।
तन्नो मंद: प्रचोदयात ।।
शनि देव की आरती
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव….
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव….
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव….
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव….
जय जय श्री शनि देव….
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
जय जय श्री शनि देव…
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