Rudraksha Wearing Rules: ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, रुद्राक्ष को पवित्रतापूर्वक और नियमों के अनुसार धारण करना शुभ होता है। प्रत्येक मुखी रुद्राक्ष कुछ ग्रहों से संबंधित है, और उचित दिन और शुभ मुहूर्त में उसे पहनना चाहिए।
Rudraksha Wearing Rules: ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में कहा गया है कि महादेव शिव के नेत्रों से अश्रु बहते हुए रुद्राक्ष बन गया था। जब भगवान शिव ने सती के वियोग में रोया, तो उनके आंसू धरती पर गिरे और वहीं से यह दिव्य बीज निकला, जिसे हम रुद्राक्ष कहते हैं।
यह केवल प्राकृतिक बीज नहीं है, बल्कि देवताओं में देव महादेव की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व है। रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को शांति, बल, साहस और आत्म-एकाग्रता मिलती है। यह भी ग्रह दोष, नकारात्मक ऊर्जा और कर्मजनित क्लेशों को दूर करने में बहुत प्रभावी है।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, रुद्राक्ष को पवित्रतापूर्वक और नियमों के अनुसार धारण करना शुभ होता है। प्रत्येक मुखी रुद्राक्ष कुछ ग्रहों से संबंधित है, और उचित दिन और शुभ मुहूर्त में उसे पहनना चाहिए। आइए जानते हैं रुद्राक्ष धारण करने के तरीके, नियम, मंत्र और ज्योतिषीय फायदे।
रुद्राक्ष धारण करने की शास्त्रीय नियम और प्रक्रिया
- रुद्राक्ष धारण करना केवल एक आध्यात्मिक परंपरा नहीं है; यह एक शक्तिशाली ज्योतिषीय उपकरण भी है, जो ग्रहदोष, मानसिक तनाव और आत्मिक अशांति को दूर करने में सक्षम है। यद्यपि, इसका पूरा और सकारात्मक प्रभाव पाने के लिए, इसे धारण करने से पहले कुछ विशिष्ट नियमों का पालन करना आवश्यक है।
- रुद्राक्ष धारण करने से पहले कम से कम नौ बार “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ ह्रीं नमः” मूल मंत्र जाप करें। रुद्राक्ष में शिव की ऊर्जा को इस जाप से जगाया जा सकता है, जो इसे जीवित बनाता है।
- बिना स्नान किए रुद्राक्ष नहीं छूना चाहिए। स्नान करते समय ही इसे पहनें। रुद्राक्ष का प्रभाव शुद्धता से कई गुना बढ़ जाता है।
- रुद्राक्ष को लाल या पीले धागे में पहनना शुभ माना जाता है।
- क्योंकि काले धागे नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं, इसका प्रयोग वर्जित है।
- रुद्राक्ष लगाने वाले व्यक्ति को मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। रुद्राक्ष की ऊर्जा को यह संयम रखता है।
- नवजात शिशु के जन्मस्थान या श्मशान घाट पर रुद्राक्ष ले जाना गैरकानूनी है। इन स्थानों की ऊर्जा रुद्राक्ष की शुद्धता को बदल सकती है।
- एक बार जो रुद्राक्ष किसी ने धारण कर लिया है, उसे किसी अन्य को नहीं देना चाहिए। यह व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधन है और इसकी ऊर्जा विशेष होती है।
- समय-समय पर रुद्राक्ष की माला साफ करें। यदि धागा गंदा या टूट गया है, तो उसे गंगाजल से धोकर उसे बदलें।
रुद्राक्ष धारण करने की एक विशिष्ट प्रक्रिया
- रुद्राक्ष को सोमवार, महाशिवरात्रि या श्रावण मास के किसी शुभ दिन धारण करना सबसे अच्छा है।
- धारण करने से पहले तांबे या चांदी की एक कटोरी लें।
- शहद, घी, शक्कर, दही, दूध और मिलाएं।
- उस मिश्रण को रुद्राक्षों पर लगाएं।
- इसके बाद गंगाजल से स्नान करना चाहिए।
- रुद्राक्ष को लाल कपड़े पर रखें।
- एक गाय के घी का दीपक जलाएं।
- अब 108 बार ॐ नमः शिवाय मंत्र बोलें।
- अंत में रुद्राक्ष धारण करें।
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