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राजस्थान में धर्मांतरण विरोधी बिल 2025 को विधानसभा ने फिर से पारित किया है। जानिए इतिहास, विरोध, और क्या यह बिल इस बार कानून बन पाएगा या फिर ठंडे बस्ते में जाएगा।
राजस्थान विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी बिल 2025 को एक बार फिर से पारित कर दिया गया है। लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह बिल इस बार कानून बन पाएगा या पहले की तरह फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा। यह बिल धार्मिक रूप से संप्रदाय परिवर्तन को रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इस पर विधानसभा से लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी बहस हो रही है।
धर्मांतरण बिल का इतिहास
राजस्थान में यह बिल पहली बार 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार ने विधानसभा में पेश किया था। उस समय बिल को गवर्नर ने राष्ट्रपति के पास भेज दिया था, जहां यह कई सालों तक पेंडिंग रहा। 2008 में विधानसभा में फिर से बिल पास हुआ, लेकिन तब भी इसे मंजूरी नहीं मिली। 2018 में भी राष्ट्रपति ने इस बिल को आपत्तियों के साथ वापस भेजा था।
2025 में फिर से बिल पारित
दिसंबर 2023 में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद बिल को लेकर फिर से सक्रियता बढ़ी। इस साल फरवरी में बिल पेश किया गया, लेकिन चर्चा नहीं हो सकी। अगस्त में कैबिनेट ने संशोधित बिल को मंजूरी दी और 9 सितंबर 2025 को इसे विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। अब यह बिल गवर्नर हरिभाऊ बागड़े के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
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क्या बनेगा कानून?
गवर्नर के पास बिल को मंजूरी देने, वापस भेजने या राष्ट्रपति को भेजने के विकल्प होते हैं। यदि गवर्नर बिल को वापस भेजता है और विधानसभा पुनः पास करती है, तो मंजूरी देना अनिवार्य है। लेकिन राष्ट्रपति को भेजने पर उन्हें मंजूरी देने की बाध्यता नहीं होती।
विपक्ष और सामाजिक संगठन क्या कहते हैं?
कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी समेत विपक्षी दल बिल को गैरजरूरी बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) ने बिल को असंवैधानिक बताया है और चेतावनी दी है कि मंजूरी मिलने पर भी इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।
विशेषज्ञों की राय
राजस्थान हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट आर. एन. माथुर के अनुसार, बिल को कानून बनाने के लिए गवर्नर और राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है। उन्होंने बताया कि देश के 11 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून बन चुके हैं, लेकिन वे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के कारण पेंडिंग हैं।
सरकार का विश्वास
राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम का कहना है कि इस बार बिल में उन सभी आपत्तियों को दूर कर दिया गया है, जो पहले कानून बनने में बाधक थीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस बिल को इस बार मंजूरी मिलेगी और यह कानून बन जाएगा।