राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गोयनका ट्रस्ट द्वारा आयोजित “गोयनका रिकग्निशन सम्मान समारोह 2025” को संबोधित करते हुए कहा कि विकृतियों का समाधान संस्कारों में निहित है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “सनातन है तो हम हैं, और सनातन नहीं है तो हम भी नहीं होंगे।” उनका मानना है कि समाज केवल इमारतों और सड़कों से नहीं बनता, बल्कि मानवीय मूल्य, सेवा और परंपराएं भी जीवित रहनी चाहिए।
अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने समारोह का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया और शेखावाटी क्षेत्र के उन गुमनाम नायकों को सम्मानित किया, जिन्होंने समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कला, खेल और सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान दिया है। उन्होंने गोयनका परिवार की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस परिवार ने शेखावाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया है।
अध्यक्ष ने कहा, “हम कहीं भी रहें, यह राजस्थान हमारा है। जन्मभूमि से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि जड़ें ही किसी व्यक्ति या समाज की पहचान होती हैं।” उन्होंने इस अवसर पर कहा कि सामाजिक सेवा और व्यापार जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं, और जड़ों से जुड़ाव ही समाज की प्रगति सुनिश्चित करता है।
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अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति की भी सराहना की और कहा कि 21वीं सदी भारत की होगी। उनका कहना था कि देश का सम्मान विश्व स्तर पर बढ़ रहा है और भारत हर क्षेत्र में सफलता की नई ऊंचाइयां छू रहा है।
समारोह के बाद, विधानसभा अध्यक्ष ने सालासर बालाजी के दर्शन किए और प्रदेश व देश की खुशहाली की प्रार्थना की। इसके साथ ही, वे आगामी तीन दिवसीय दिल्ली यात्रा पर निकलेंगे, जहां वे अखिल भारतीय विधान सभा अध्यक्षों के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
यह कार्यक्रम न केवल सम्मान समारोह था, बल्कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का उत्सव भी था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और ऊर्जा का स्रोत बनेगा।