प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत पहलगाम में हुए आतंकी से की। उनका दावा था कि कश्मीर में शांति वापस आ रही है। वहां पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी। वर्तमान समय में, देश के शत्रुओं ने कश्मीर को फिर से नष्ट करने का प्रयास किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात के 121वें एपिसोड में देश-दुनिया को संबोधित कर रहे हैं। उनका भाषण आतंकवाद के खिलाफ था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कश्मीर में शांति वापस आ रही है। वहां आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। विकास कार्यों की गति तेज थी। ऐसे में कश्मीर के शत्रुओं ने फिर से हमला करने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सभी नागरिकों की एकजुटता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्हें यह भी बताया कि आतंक के खिलाफ इस लड़ाई में 140 करोड़ लोग पूरी दुनिया से जुड़े हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में एक बार फिर पीड़ितों के परिवारों को भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय मिलकर रहेगा। उनका कहना था कि कई देशों के नेताओं ने उनसे फोन पर बात की और भारत को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “पूरा विश्व, आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में, 140 करोड़ भारतीयों के साथ खड़ा है”। मैं पीड़ित परिवारों को एक बार फिर भरोसा देता हूँ कि उन्हें न्याय मिलेगा। इस हमले की साजिश रचने वालों और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।”
डॉ. के कस्तूरीरंगन की स्मृति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दो दिन पहले हमने देश के महान वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन जी को खो दिया है।” उनका योगदान विज्ञान, शिक्षा और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाई देने में हमेशा याद किया जाएगा। इसरो को उनके नेतृत्व में नई पहचान मिली। उन्होंने देश की नई शिक्षा नीति बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। डॉ॰ कस्तूरीरंगन ने २१वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप आगे देखने वाली शिक्षा का विचार विकसित किया था। आज भारत वैश्विक स्पेस पावर है। हमने 104 सैटेलाइट एक साथ लॉन्च करके रिकॉर्ड बनाया है। हम चंद्रमा के दक्षिणी पोल पर पहुंचने वाले पहले देश बन गए हैं। भारत कम लागत पर स्पेस में काम कर रहा है। इसरो कई देशों के स्पेस मिशनों में सहायक है।”
म्यांमार भूकंप में डॉक्टरों ने बहुत से लोगों को बचाया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले महीने म्यांमार में भूकंप से भारी नुकसान हुआ था और मलबे में फंसे लोगों के लिए भारतीय दल ने क्षेत्रीय अस्पताल बनाया था। इंजीनियरों की एक टीम ने महत्वपूर्ण इमारतों को हुए नुकसान का आकलन करने में मदद की। भारतीय टीम ने वहां कंबल, टेंट स्लीपिंग बैग्ल, दवाइयां, खाने-पीने का सामान और बहुत कुछ भेजा। यूथोपिया में रहने वाले भारतीयों ने जन्म से ही हृदय की बीमारी से पीड़ित बच्चों को भारत भेजने का प्रयास किया है। भारतीय परिवारों ने भी ऐसे बच्चों को आर्थिक सहायता दी है। भारत ने अफगानिस्तान और नेपाल को कुछ ही दिन पहले दवाई और टीके की बड़ी खेप भेजी है। इनसे कई बीमारियां बेहतर हो सकती हैं।
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