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हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसका प्रयोग इस तरह होना चाहिए जिससे सदन की मर्यादा और कार्यप्रणाली प्रभावित न हो। उन्होंने हरियाणा विधानसभा के मुख्य द्वार पर विपक्ष द्वारा किए गए प्रदर्शन को अनुचित बताया।
विधानसभा के बाहर प्रदर्शन पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सुबह विधानसभा परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोध जताने के लिए स्थान और तरीका दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। उनके अनुसार, सदन के मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है और इससे विधानसभा की गरिमा पर प्रभाव पड़ सकता है।
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विरोध के लिए तय स्थान का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यदि विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए मंच चाहिए, तो चंडीगढ़ के सेक्टर-25 में प्रदर्शन के लिए पहले से निर्धारित स्थान उपलब्ध है। वहां शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराया जा सकता है और प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की रोक नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय स्थान पर सीमित समय के लिए प्रदर्शन करने की पूरी स्वतंत्रता है।
अध्यक्ष की भूमिका पर जताया भरोसा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संस्थागत जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व है, जो सदन के संरक्षक होते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में अध्यक्ष द्वारा लिए गए हर निर्णय के साथ सरकार मजबूती से खड़ी है।
निष्पक्षता और परंपराओं के पालन की सराहना
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा अध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने सदन की परंपराओं का पालन करते हुए सभी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अध्यक्ष ने कभी किसी सदस्य के साथ भेदभाव नहीं किया और विपक्ष को भी अपने विचार रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने लगातार निष्पक्षता का परिचय दिया है, भले ही कभी-कभी मामूली असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई हो।