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नवरात्रि व्रत में चाय-कॉफी पीना सही है या गलत? जानिए धार्मिक शास्त्रों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्रत के दौरान चाय-कॉफी के सेवन से जुड़े नियम, व्रत में किन पेयों और खाद्य पदार्थों का उपयोग करें।
नवरात्रि के पावन अवसर पर व्रत रखते समय अक्सर कई लोग चाय या कॉफी पीने की आदत को लेकर उलझन में रहते हैं। क्या व्रत के दौरान चाय या कॉफी पीना व्रत तोड़ता है या नहीं? धार्मिक शास्त्रों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानें व्रत में चाय-कॉफी के सेवन से जुड़ी सच्चाई।
व्रत में चाय-कॉफी पीना क्यों माना जाता है गलत?
हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार, व्रत मात्र आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि संयम और आत्मसंयम का भी प्रतीक है। गरुड़ पुराण, मनुस्मृति, और धर्मसिंधु जैसे धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि व्रत के दौरान सात्त्विक भोजन और पेय का सेवन करना चाहिए। चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन एक उत्तेजक तत्त्व है, जिसे तामसिक और राजसिक पदार्थ माना जाता है। इसलिए, व्रत में चाय-कॉफी पीना शास्त्रों के अनुसार वर्जित है।
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क्या चाय-कॉफी पीने से व्रत टूट जाएगा?
शास्त्रीय दृष्टिकोण से व्रत के दौरान तामसिक और उत्तेजक पदार्थों का सेवन व्रत को खंडित कर सकता है। चाय-कॉफी व्रत के नियमों के खिलाफ मानी जाती है क्योंकि यह शरीर और मन दोनों को शुद्ध रखने में बाधा डालती है। इसलिए व्रत के दौरान चाय या कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए।
व्रत के दौरान क्या खाएं और क्या पीएं?
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फल: केले, सेब, अनार, अंगूर, पपीता जैसे ताजे फल।
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सूखे मेवे: बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश, मखाना।
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दूध और डेयरी: दूध, दही, छाछ, लस्सी, पनीर।
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अन्य: साबूदाना खिचड़ी, वड़ा, खीर, शकरकंद, सिंघाड़े की पूरी, आटे-आलू की पूड़ी।
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नमक: सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग करें।
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शहद और गुड़: ऊर्जा और सात्त्विकता बनाए रखते हैं।
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नारियल पानी: हाइड्रेशन और शुद्धता के लिए उत्तम।