पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान से नशामुक्त पंजाब का सपना साकार। नशा तस्करी पर सख्त कार्रवाई, 4,500+ नशामुक्त गांव और पुनर्वास केंद्रों से उज्ज्वल भविष्य की ओर।
पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में “युद्ध नशियां विरुद्ध” अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य राज्य को नशे की जकड़न से मुक्त कर एक स्वस्थ, खुशहाल और प्रगतिशील पंजाब बनाना है।
मुख्यमंत्री मान ने कहा, “हमने नशामुक्त पंजाब का संकल्प लिया है, और जनता के सहयोग से कोई भी ताकत हमें रोक नहीं सकती।” सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति अपनाई है और 553 किलोमीटर लंबी पंजाब-पाकिस्तान सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात कर तस्करी को रोकने के लिए कदम उठाए हैं।
also read: पंजाब सरकार है हर जीव के साथ: पंजाब में आवारा पशुओं की…
अभियान की प्रमुख उपलब्धियां
-
अब तक कुल 23,823 मामले दर्ज और 35,563 आरोपी गिरफ्तार।
-
बरामद नशीले पदार्थ:
-
हेरोइन: 1,525.068 किलोग्राम
-
अफीम: 545.058 किलोग्राम
-
पोपी हस्क/हरे पौधे: 26,254.965 किलोग्राम
-
चरस: 38.245 किलोग्राम
-
गांजा: 527.162 किलोग्राम
-
कोकीन: 4.124 किलोग्राम
-
आइस: 15.156 किलोग्राम
-
नशीला पाउडर: 36.978 किलोग्राम
-
-
इंजेक्शन: 1,575
-
टैबलेट्स/कैप्सूल्स: 40,00,444
-
बरामद नकदी: ₹13,60,95,651
नशामुक्त ग्राम और पुनर्वास
सरकार ने गांव-गांव ‘नशामुक्त ग्राम रक्षा समितियां’ गठित की हैं। अब तक 4,500 से अधिक गांव नशामुक्त घोषित हो चुके हैं, जिनमें नवांशहर जिले का लंगड़ोया गांव मिसाल बना है।
पुनर्वास केंद्रों को मज़बूत किया गया है और कक्षा 9 से 12 तक नशा विरोधी शिक्षा को स्कूलों में शामिल किया गया है। लुधियाना की मनमीत कौर जैसी कई महिलाएं सरकार के पुनर्वास कार्यक्रम से नई जिंदगी पा रही हैं।
मुख्यमंत्री मान ने कहा, “‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि पंजाब की आत्मा को पुनर्जीवित करने की लड़ाई है।” यह जंग अब हर पंजाबी की जंग बन चुकी है, और राज्य में नशामुक्त, उज्ज्वल और सशक्त पंजाब का निर्माण हो रहा है।