मुक्तसर साहिब में माघी मेला का भव्य आगाज, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चालीस मुक्तों को नमन किया। जानें माघी मेले और चालीस मुक्तों का ऐतिहासिक महत्व।
मुक्तसर साहिब में ऐतिहासिक माघी मेला श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया है। यह मेला दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चालीस मुक्तों के अदम्य साहस और शहादत को याद करने के लिए मनाया जाता है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र स्थान पर पहुंचकर गुरुओं के चरणों में शीश नवाते हुए महान शहीदों को सम्मान दे रहे हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मेला माघी के अवसर पर श्री मुक्तसर साहिब का दौरा किया। उन्होंने सबसे पहले गुरुद्वारा टूटी गंढी साहिब में माथा टेका और उसके बाद एक रैली में शामिल होकर जनता को संबोधित किया। इस अवसर पर सीएम मान ने संगतों को माघी मेले और चालीस मुक्तों के बलिदान के महत्व के बारे में जानकारी दी।
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इससे पहले, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर चालीस मुक्तों को नमन करते हुए संदेश जारी किया। उन्होंने लिखा कि, “उन 40 मुक्तों की शहादत को करोड़ों नमन, जिन्होंने धर्म और इंसाफ के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।” सीएम ने माघी मेले में गुरुओं के चरणों में शीश नवाने आई संगतों का भी सम्मान किया।
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ਸੂਬੇ ‘ਚ ਅਮਨ-ਸ਼ਾਂਤੀ ਤੇ ਆਪਸੀ ਭਾਈਚਾਰਕ… pic.twitter.com/iXQZs2k7dl
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) January 14, 2026
माघी मेला के चलते मुक्तसर साहिब में श्रद्धा का अद्भुत माहौल बना हुआ है। लोहड़ी की रात से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। सुबह से लेकर दोपहर तक गुरुद्वारा दरबार साहिब में माथा टेकने और पवित्र सरोवर में स्नान करने का सिलसिला लगातार जारी रहा। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद संगतों की आस्था में कोई कमी नहीं देखी गई।
इतिहास में माघी मेला 1705 में खिदराना युद्ध के दौरान गुरु गोबिंद सिंह जी के लिए लड़ते हुए चालीस मुक्तों के बलिदान को याद करने के लिए मनाया जाता है। यह युद्ध बाद में मुक्तसर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इन महान शहीदों ने मुगलों के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी, और यही बलिदान आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।