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Marriage Astrology 2025: जानिए शादी से पहले क्यों किया जाता है गण मिलान, देव-मानव-राक्षस गण का वैवाहिक जीवन पर असर, अष्टकूट मिलान से रिश्ता रहेगा सुखी और संतुलित।
Marriage Astrology: हिंदू धर्म में विवाह केवल दो व्यक्तियों का मेल नहीं, बल्कि उनके परिवारों का भी मिलन होता है। इस पवित्र कर्मकांड में वर-वधू की कुंडली मिलान की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिससे वैवाहिक जीवन के सुख-शांति और दीर्घायु का अनुमान लगाया जाता है।
गण मिलान क्या है?
अष्टकूट मिलान के तहत कुल 36 गुणों की तुलना की जाती है। इनमें से एक महत्वपूर्ण पहलू है गण मिलान। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गण मिलान के तीन प्रकार होते हैं:
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देव गण: शांत, विनम्र, दयालु और धार्मिक स्वभाव वाले व्यक्ति।
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मानव गण: व्यवहारिक, समझदार और सामाजिक दृष्टिकोण रखने वाले।
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राक्षस गण: साहसी, आत्मविश्वासी और निर्णायक क्षमता वाले व्यक्ति।
वर-वधू के जन्म नक्षत्र के आधार पर गण तय होता है और इससे अनुमान लगाया जाता है कि उनका वैवाहिक जीवन किस प्रकार का रहेगा।
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गण मिलान क्यों जरूरी है?
गुण मिलान के सिर्फ 1 अंक का योगदान होने के बावजूद, यह वैवाहिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही गण मिलान से जीवन साथी आपसी समझ, प्रेम और सहयोग के साथ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। वहीं, अगर गण मेल नहीं खाता तो मतभेद, झगड़े और विवाद की संभावना बढ़ जाती है।
अलग-अलग गणों के मेल का असर
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देव गण + मानव गण: सामान्यतः संतुलित और सुखी जीवन।
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देव गण + राक्षस गण: संघर्षपूर्ण, समझौते की आवश्यकता।
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मानव गण + राक्षस गण: सावधानीपूर्वक रिश्ता शुरू करना चाहिए।
शादी से पहले गण मिलान की प्रक्रिया केवल परंपरा नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन में सामंजस्य और सुख-शांति सुनिश्चित करने का एक वैज्ञानिक तरीका भी है।