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अक्सर लोग हार्ट अटैक को केवल सीने में दर्द से जोड़ते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार पैरों से जुड़ी कुछ समस्याएं भी दिल की बीमारी का संकेत हो सकती हैं। खासकर सर्दियों में हार्ट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है और इस दौरान हार्ट अटैक के मामले भी ज्यादा देखे जाते हैं। पैरों में सूजन, दर्द या सुन्नपन जैसे लक्षणों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
पैरों की नसों की समस्या और दिल का संबंध
मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर पैरों की नसों में ब्लॉकेज या खराबी होती है तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। इसे पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) कहा जाता है। इस स्थिति में पैरों की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है, जिससे ब्लॉकेज और सूजन होती है। इसका असर केवल पैरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दिल की धमनियों में भी ब्लॉकेज का खतरा बढ़ा देता है।
पेरिफेरल आर्टरी डिजीज के शुरुआती लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं और अक्सर लोग उन्हें हल्का समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके मुख्य संकेत हैं:
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चलने या सीढ़ी चढ़ने पर पैरों में दर्द या ऐंठन
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टखनों और पैरों में सूजन
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पैरों में ठंडक या सुन्नपन
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स्किन का रंग नीला या बैंगनी पड़ना
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त्वचा का रूखापन और नाखूनों का मोटा या पीला होना
PAD में पैरों की नसों में बनी ब्लॉकेज दिल को भी प्रभावित कर सकती है और ऐसे मरीजों में हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है। मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और शारीरिक गतिविधि की कमी इसे और जोखिमपूर्ण बना देते हैं।
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हार्ट फेल्योर के शुरुआती संकेत
हार्ट फेल्योर के लक्षण अक्सर इतने हल्के होते हैं कि लोग उन्हें उम्र बढ़ने का असर समझ लेते हैं। इसके प्रमुख संकेत हैं:
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धीरे-धीरे थकान बढ़ना और फिजिकल क्षमता कम होना
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पैरों और टखनों में सूजन
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सांस फूलना और शरीर में पानी का जमा होना
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जूते टाइट लगना और पेट का फूला रहना
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सुबह चेहरे पर सूजन और रात में बार-बार पेशाब आना
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बिना वजह अत्यधिक थकान महसूस होना
पैरों की सूजन और दर्द से कैसे बचें
डॉक्टरों का कहना है कि पैरों में सूजन, दर्द या सुन्नपन जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए, खासकर यदि पहले से दिल की बीमारी रही हो। बचाव के लिए यह उपाय अपनाए जा सकते हैं:
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रोजाना एक्सरसाइज और पैदल चलने की आदत डालें
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संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक आहार लें
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ज्यादा फैट, मैदा और रेड मीट से बचें
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मानसिक तनाव को कम करें