कुरुक्षेत्र इंटरनेशनल गीता महोत्सव में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर और गीता के जीवन दर्शन पर जोर दिया। जानिए उनके मुख्य संदेश।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित इंटरनेशनल गीता महोत्सव में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शिरकत की और गीता के जीवन दर्शन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस अवसर पर भारतीय सेना की ऑपरेशन सिंदूर में की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया और इसे केवल सैन्य अभियान नहीं बल्कि भारत की आत्म-प्रतिबद्धता और आत्म-सम्मान का संदेश बताया।
रक्षामंत्री ने कहा, “हमने दुनिया को दिखाया कि भारत लड़ाई नहीं चाहता, लेकिन जब मजबूर किया गया तो हम पीछे नहीं हटेंगे। भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को भी यही समझाया था कि युद्ध धर्म और न्याय की रक्षा के लिए किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर वही धर्मयुक्त कर्म था।”
उन्होंने आगे कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि हर युग और हर दिन का मार्गदर्शक है। गीता का वास्तविक उद्देश्य तब पूरा होता है जब हम इसे अपने व्यवहार, निर्णय और कर्म में लागू करते हैं। संघर्ष जीवन का हिस्सा है, और गीता हमें संघर्षों से निपटने की शक्ति और साहस देती है।
also read: जी-20 समिट में हिस्सा लेने दक्षिण अफ्रीका रवाना हुए पीएम…
गीता और आधुनिक जीवन:
-
राजनाथ सिंह ने गीता को इमोशनल इंटेलिजेंस सिखाने वाला ग्रंथ बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञानी व्यक्ति सुख-दुःख को संतुलित दृष्टि से देखता है और अपने कर्मों में उन्माद नहीं लाता।
-
उन्होंने कहा कि गीता भारतीय मैनेजमेंट का सबसे पुराना मॉडल है। इसमें नेतृत्व, समस्या समाधान और व्यक्तिगत विकास की शिक्षाएं निहित हैं।
-
गीता हमें यह भी सिखाती है कि शांति और शक्ति विरोधी नहीं हैं, बल्कि वास्तविक शांति तब आती है जब उसके पीछे आत्मविश्वास और बल हो।
रक्षामंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का कार्य केवल आर्थिक और तकनीकी विकास नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास भी होना चाहिए। गीता का संदेश आज के मानसिक तनाव और डिप्रेशन के दौर में लोगों के लिए नई दिशा और संबल प्रदान करता है।
कुरुक्षेत्र के इस महोत्सव ने यह संदेश दिया कि भारत एक विराट कर्मभूमि है, जहां सैनिक, वैज्ञानिक, किसान और युवा अपने-अपने क्षेत्रों में धर्म और कर्तव्य का पालन कर रहे हैं।