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कृष्णा जी की छठी 2025 कब है और क्यों लगता है कढ़ी चावल का भोग? जानें कृष्ण जन्माष्टमी के बाद छठी मनाने का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और कढ़ी चावल के भोग का रहस्य।
कृष्णा जी की छठी 2025: कृष्णा जन्माष्टमी के छह दिन बाद, यानी 21 अगस्त 2025 को भगवान श्रीकृष्ण की छठी मनाई जाएगी। यह पर्व बाल गोपाल के जन्म के बाद छठे दिन मनाए जाने वाले विशेष अनुष्ठान का प्रतीक है। इस दिन खासतौर पर कढ़ी चावल का भोग लगाया जाता है, जिसकी पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व है।
कृष्णा जी की छठी कब होती है?
कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को थी। उसके छठे दिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि को कान्हा जी की छठी मनाई जाती है। हिंदू धर्म के अनुसार, नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन स्नान कराकर उसे पवित्र किया जाता है और नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। इस दिन पूजा-अर्चना के साथ बच्चे की दीर्घायु और उज्जवल भविष्य की कामना की जाती है।
छठी मनाने का महत्व क्या है?
शास्त्रों के मुताबिक, नवजात शिशु जन्म के समय अशुद्ध होता है। इसलिए छठे दिन बच्चे को शुद्ध करने और उसकी रक्षा के लिए छठी का आयोजन किया जाता है। छठी माता की पूजा से बच्चे के स्वस्थ और समृद्ध जीवन की कामना की जाती है।
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कृष्णा जी की छठी पूजा कैसे करें?
छठी के दिन सबसे पहले बाल गोपाल का स्नान कराकर उन्हें नए वस्त्र, मोरपंक, बांसुरी और आभूषणों से सजाया जाता है। पूजा में चंदन, केसर, हल्दी, फल, फूल, धूप-दीप का अर्पण किया जाता है। नामकरण भी इसी दिन होता है, और पूरे वर्ष उसी नाम से भगवान की साधना की जाती है।
कढ़ी चावल का भोग क्यों लगाया जाता है?
कढ़ी चावल में दही और बेसन होता है, जो सात्विक और पौष्टिक भोजन माना जाता है। भगवान कृष्ण को दही अत्यंत प्रिय था। यह भोजन शीतलता प्रदान करता है, पचाने में आसान है और स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। इसलिए छठी के दिन कढ़ी चावल का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है।
छठी पूजा 2025 के शुभ मुहूर्त
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:26 से 05:10 तक
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अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:58 से 12:50 तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 से 03:26 तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:54 से 07:16 तक
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अमृत काल: शाम 05:49 से 07:24 तक
छठी पूजा का इतिहास
त्रेता युग में भगवान राम के जन्म के छठे दिन भी छठी का आयोजन हुआ था। इसी परंपरा का पालन आज भी कृष्ण जन्म के बाद छठी के रूप में किया जाता है।