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कार्तिक मास 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास को सबसे पवित्र महीनों में एक माना जाता है। इस पूरे महीने व्रत, स्नान, दीपदान और दान जैसे धार्मिक कर्म करने से व्यक्ति को हजार गुना पुण्य प्राप्त होता है। यह महीना भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागने का समय भी होता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
कार्तिक मास कब से कब तक 2025 में?
कार्तिक मास 2025 में 14 अक्टूबर से 12 नवंबर तक रहेगा। इस दौरान करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज और छठ पूजा जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे।
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कार्तिक मास में स्नान का महत्व
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कार्तिक माह में प्रात:काल सूर्योदय से पहले स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है।
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यदि संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है।
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घर पर भी गरम पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है।
दीपदान का विशेष फल
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शास्त्रों में कहा गया है कि कार्तिक मास में जलाया गया एक दीपक हज़ार दीपों के बराबर फल देता है।
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शाम को तुलसी के पास, घर के द्वार और मंदिरों में दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और धन, सुख व समृद्धि का आगमन होता है।
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यह मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है।
सात्विक भोजन और संयम से मिलती है शांति
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इस माह में प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा का त्याग कर सात्विक भोजन (फल, दूध, हल्का अन्न) करना चाहिए।
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मौन व्रत, ध्यान और सत्संग से मानसिक शुद्धता और आत्मिक शांति मिलती है।
दान का महत्व: मिलेगा हज़ार गुना फल
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कार्तिक मास में किया गया दान, चाहे वह अन्न, वस्त्र, दीप या भूमि का हो – हजार गुना पुण्य देता है।
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खासकर गरीबों, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि आती है।
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यह मास पुण्य अर्जन, पाप नाश और मोक्ष प्राप्ति के लिए उत्तम समय होता है।