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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस और फै्टी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अक्सर पेट के आसपास चर्बी बढ़ना, दिनभर थकान रहना, मीठा खाने की बार-बार इच्छा होना और सिर भारी लगना जैसी समस्याओं को लोग सामान्य मान लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ये संकेत शरीर में बढ़ती इंसुलिन रेजिस्टेंस और फै्टी लिवर डिजीज की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं।
अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज का रूप ले सकती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान लाइफस्टाइल बदलाव अपनाकर इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
क्या है इंसुलिन रेजिस्टेंस?
इंसुलिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है जो शरीर में ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सही प्रतिक्रिया नहीं देतीं, तो इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है।
इसके प्रमुख कारण हैं:
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असंतुलित आहार
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शारीरिक गतिविधि की कमी
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अधिक तनाव
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धूम्रपान और शराब का सेवन
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रिफाइंड कार्ब्स और सैचुरेटेड फैट से भरपूर डाइट
फैटी लिवर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है —
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अत्यधिक शराब सेवन से होने वाला फैटी लिवर
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नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD), जो मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और खराब जीवनशैली से जुड़ा होता है
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1. देर रात खाना खाने की आदत छोड़ें
देर से डिनर करने से शरीर की सर्कैडियन रिदम प्रभावित होती है। रात के समय इंसुलिन सेंसिटिविटी कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है।
क्या करें?
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रात का खाना सोने से कम से कम 2–3 घंटे पहले खाएं
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डिनर हल्का और फाइबर युक्त रखें
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सब्जियों और प्रोटीन को प्राथमिकता दें
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देर रात स्नैकिंग से बचें
यह आदत शुगर कंट्रोल सुधारने में मदद कर सकती है।
2. नाश्ते में प्रोटीन जरूर शामिल करें
अगर दिन की शुरुआत हाई-प्रोटीन और लो-ग्लाइसेमिक नाश्ते से की जाए तो पूरे दिन ब्लड शुगर स्थिर रहता है और बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है।
नाश्ते में क्या शामिल करें?
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अंडे
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दाल या पनीर
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ग्रीक योगर्ट
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नट्स और बीज
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ओट्स के साथ प्रोटीन स्रोत
हर मील में हेल्दी फैट और फाइबर शामिल करने से ऊर्जा बनी रहती है और इंसुलिन स्पाइक्स कम होते हैं। साथ ही 7–8 घंटे की नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट भी बेहद जरूरी है।
3. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
सिर्फ वॉक करना ही काफी नहीं है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मसल्स को मजबूत बनाती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने में मदद करती है।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के फायदे:
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ब्लड शुगर नियंत्रण में सुधार
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वजन घटाने में मदद
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ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल में कमी
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दिल की बीमारियों का जोखिम कम
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डायबिटीज से जुड़ी जटिलताओं का खतरा कम
हफ्ते में कम से कम 2–3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने की सलाह दी जाती है।