भारत-यूके FTA के तहत कृषि उत्पादों को मिलेगा बेहतर बाजार और मूल्य। किसानों के हितों का पूरा संरक्षण, यूके में 0% इम्पोर्ट ड्यूटी से बढ़ेगा भारतीय कृषि निर्यात। जानिए कैसे मिलेगा किसानों को फायदा।
भारत-यूके FTA: भारत और यूके के बीच हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (FTA) का कृषि क्षेत्र पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस ऐतिहासिक डील को किसानों के हित में बड़ा कदम बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस समझौते में किसानों के हितों का पूरा संरक्षण किया गया है। किसानों की सेवा को भगवान की पूजा समान माना गया है, इसलिए ऐसे उत्पाद जिनके आयात से किसानों को नुकसान हो सकता था, उनमें कोई छूट या रियायत नहीं दी गई है। गेहूं, चावल, मक्का, सेब, अंगूर, आम, आलू, प्याज़, लहसुन, मसूर, राजमा, काजू, बादाम और मसालों जैसे हल्दी, बड़ी इलायची पर कोई कंसेशन नहीं है।
केंद्र सरकार के मुताबिक, भारत एक ट्रेड सरप्लस देश है, जहां कृषि उत्पादों का निर्यात यूके को 8,500 करोड़ रुपये का है, जबकि आयात मात्र 3,200 करोड़ रुपये का है। इस वजह से भारत को इस समझौते से लाभ मिलेगा।
यूके ने भारत से आने वाले प्रमुख कृषि उत्पादों जैसे फल, सूखे मेवे, सब्जियां, तिलहन, दलहन और डेयरी उत्पादों पर 0% आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) लागू कर दी है। इसका मतलब यह है कि अब यूके में ये उत्पाद सस्ते और व्यापक पैमाने पर उपलब्ध होंगे, जिससे भारत के किसानों को ज्यादा बाजार मिलेगा और उनका निर्यात बढ़ेगा।
शिवराज सिंह ने कहा कि इस समझौते में आयात के लिए कोई रियायत नहीं दी गई है, जिससे भारतीय किसानों की आर्थिक सुरक्षा बनी रहेगी। कुल मिलाकर, यह समझौता भारतीय कृषि और किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा और देश के कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा।