Importance Of Shankh: लक्ष्मीनारायण की पूजा शंख के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है? जानें इसका महत्व।

Importance Of Shankh: लक्ष्मीनारायण की पूजा शंख के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है? जानें इसका महत्व।

Importance Of Shankh: हिंदू धर्म में शंख का एक खास धार्मिक महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, शंख देवी लक्ष्मी को बहुत प्रिय है और इसका प्रयोग लक्ष्मी-नारायण की पूजा में अनिवार्य है।

Importance Of Shankh: हिंदू धर्म में शंख का एक खास धार्मिक महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, शंख देवी लक्ष्मी को बहुत प्रिय है और इसका प्रयोग लक्ष्मी-नारायण की पूजा में अनिवार्य है। यह भी कहा जाता है कि शंख का उपयोग नहीं करने वाली पूजा को देवी लक्ष्मी स्वीकार नहीं करतीं। शंख की ध्वनि को पवित्र और शुभ माना जाता है। जिस घर में नियमित रूप से शंखनाद होता है, वहाँ देवी लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है।

ध्यान, वास्तु, योग और धार्मिक विचारों में शंख की ध्वनि को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। इसकी ध्वनि जगह को शुद्ध करती है और मन को शांत और एकाग्र करती है। शंख बजाए बिना सत्यनारायण व्रत की पूजा पूरी नहीं मानी जाती है।

शंख का जन्म कैसे हुआ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय शंख का जन्म हुआ था। यह उन चौबीस रत्नों में से बारहवां था जो समुद्र मंथन में मिले थे। यह शंख पांचजन्य शंख भी कहलाता है क्योंकि समुद्र मंथन में देवता, असुर, नाग, गरुड़ और ऋषि-मुनियों ने भाग लिया था। यह स्वर जीत, सफलता और शुभता का प्रतीक है।

लक्ष्मी जी और शंख का संबंध

शंख और देवी लक्ष्मी दोनों की उत्पत्ति समुद्र मंथन से मानी जाती है। इसलिए इनमें भाई-बहन का संबंध माना जाता है। यही कारण है कि देवी लक्ष्मी को शंख बहुत प्रिय है। यह भी कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी शंख में वास करती हैं।

विष्णु और शंख का संबंध

भगवान विष्णु का प्रमुख अस्त्र शंख है। यह शंख समुद्र मंथन से प्राप्त हुआ था और तब से लोग इसे अपने हाथ में रखते हैं। माना जाता है कि शंख में देवता लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों रहते हैं। शंख जल से भगवान विष्णु को अभिषेक करने से सभी पाप दूर होते हैं और मोक्ष मिलता है।

लक्ष्मी-नारायण की पूजा में शंख का क्या अर्थ है?

शंख देवी लक्ष्मी का भाई है और भगवान विष्णु का दिव्य हथियार है। इसलिए दोनों देवताओं को यह बहुत प्रिय है। शंख यश, समृद्धि और कल्याण का प्रतीक है। यही कारण है कि शंख का स्थान लक्ष्मी-नारायण की पूजा में अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन माना जाता है।

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