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गर्भावस्था के बाद बालों का टेक्सचर बदलना आम बात है। जानें इसके पीछे के कारण, सही देखभाल के उपाय और कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं को अपने शरीर में कई बदलावों का सामना करना पड़ता है — और उनमें से एक है बालों की बनावट यानी हेयर टेक्सचर में बदलाव। कई महिलाएं महसूस करती हैं कि पहले घने, चमकदार और मजबूत बाल अब बेजान, रूखे या झड़ने लगे हैं। यह बदलाव सामान्य है और आमतौर पर हार्मोन, पोषण की कमी और स्ट्रेस के कारण होता है।
क्यों बदलता है बालों का टेक्सचर?
डॉ. उर्वशी चंद्रा के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बालों की ग्रोथ बेहतर हो जाती है। लेकिन डिलीवरी के बाद एस्ट्रोजन गिरता है, जिससे बालों का झड़ना और टेक्सचर में बदलाव देखने को मिलता है।
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पोषण की कमी का असर:
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प्रेग्नेंसी के बाद शरीर में आयरन, विटामिन D, प्रोटीन जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
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यह बालों को कमजोर, ड्राय और बेजान बना देता है।
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संतुलित आहार, दालें, हरी सब्ज़ियां और पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है।
स्ट्रेस और दिनचर्या का प्रभाव:
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बच्चे की देखभाल और नींद की कमी से महिलाओं में तनाव बढ़ता है।
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मानसिक और शारीरिक थकान से बालों की क्वालिटी प्रभावित होती है।
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हल्का व्यायाम, मेडिटेशन और अच्छी नींद बालों के टेक्सचर को सुधारने में मदद करते हैं।
बालों की देखभाल के टिप्स:
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कम केमिकल वाले शैम्पू और कंडीशनर चुनें।
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नारियल, आंवला या बादाम का तेल से मालिश करें।
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हफ्ते में 1-2 बार गर्म तेल से सिर की मसाज बालों को मजबूत बनाती है।
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हेयर ड्रायर और स्ट्रेटनर के अधिक इस्तेमाल से बचें।
कब लें डॉक्टर से सलाह?
अगर बालों का झड़ना अत्यधिक हो या टेक्सचर में लंबे समय तक कोई सुधार न हो, तो डर्मेटोलॉजिस्ट या त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है।