भगवान गणेश को मोदक के साथ-साथ दूर्वा भी अत्यंत प्रिय है। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में बताया गया है कि गणपति जी को 21 दूर्वा अर्पित करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। आइए जानते हैं गणेश जी को 21 दूर्वा चढ़ाने के पीछे का रहस्य और इसका महत्व।
21 दूर्वा चढ़ाने का पौराणिक महत्व
कहानी के अनुसार, एक बार गणेश जी ने अनलासुर नामक राक्षस को निगल लिया था। राक्षस के तेज से उनका पेट जल गया था। तब ऋषियों ने उन्हें दूर्वा खिलाई, जिससे उनका पेट शांत हुआ। तभी से दूर्वा गणेश जी की प्रिय बन गई। दूर्वा की संख्या 21 तीनों गुणों – सत्त्व, रज और तम के 7-7 गुणों का प्रतीक है। इसलिए गणपति को 21 दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है।
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21 दूर्वा चढ़ाने के फायदे और महत्व
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विघ्न हरण: सभी प्रकार के बाधाएं और संकट दूर होते हैं।
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शरीर और मन का संतुलन: सत्त्व, रज और तम का नियंत्रण होता है।
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ऊर्जा और चक्र जागृति: मूलाधार से लेकर आज्ञा चक्र तक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
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सप्तधातु शुद्धि: शरीर की सात धातुओं की शुद्धि होती है।
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रक्षा एवं सुरक्षा: आठ दिशाओं में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
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नवग्रह शांति: ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
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संकटों से मुक्ति: मृत्यु तत्व पर विजय और भय का नाश।
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समृद्धि और शांति: पूर्णिमा के दिन दूर्वा अर्पित करने से जीवन में शांति और समृद्धि आती है।
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आध्यात्मिक विकास: आठ सिद्धियां, नवविधा भक्ति और ऋषि मार्ग की स्मरण शक्ति बढ़ती है।
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समर्पण की भावना: ‘आप ही सब कुछ हैं’ की गहरी अनुभूति होती है।