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देश में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन नकदी का इस्तेमाल भी लगातार बढ़ रहा है। ताजा SBI रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, करेंसी इन सर्कुलेशन (CiC) यानी बाजार में मौजूद नोटों का कुल मूल्य अब लगभग 40 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद नकद लेन-देन की मांग कम नहीं हुई। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनका विश्लेषण SBI ने अपनी रिपोर्ट में किया है।
1. जीएसटी नोटिस के बाद नकदी की बढ़ती मांग
SBI रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2025 में कर्नाटक के लगभग 18,000 छोटे व्यापारियों को UPI ट्रांजैक्शन के आधार पर जीएसटी नोटिस भेजे गए। इसके बाद व्यापारियों का झुकाव डिजिटल पेमेंट से हटकर नकद लेनदेन की ओर बढ़ गया। उस जिले में औसतन हर महीने 37 करोड़ रुपये नकदी की निकासी बढ़ी।
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2. ब्याज दरों में कमी और ग्रामीण खपत का असर
रिपोर्ट में बताया गया कि सिर्फ डिजिटल ट्रांजैक्शन नहीं, बल्कि ब्याज दरों में कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती खपत भी नकदी की बढ़ती मांग का कारण बनी। डिजिटल पेमेंट के बढ़ने के बावजूद नकद की जरूरत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।
3. छोटे नोटों का चलन ज्यादा
देश में 100, 200 और 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। मार्च 2025 तक 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 86% तक पहुंच गई। RBI ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि ATM में 100 और 200 रुपये के नोटों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें।